भारत का सबसे पुराना Soft Drink Brand: आज जब सॉफ्ट ड्रिंक की बात होती है तो सबसे पहले Coca-Cola और Pepsi का नाम दिमाग में आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में इन विदेशी ब्रांड्स के आने से करीब एक सदी पहले ही एक भारतीय ब्रांड लोगों की प्यास बुझा रहा था? करीब 160 साल पहले ईरान से भारत आए एक पारसी कारोबारी अर्देशिर खोदादाद ईरानी ने पुणे में ऐसा कार्बोनेटेड सोडा तैयार किया, जिसने ब्रिटिश सैनिकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। यही कारोबार आगे चलकर भारत के सबसे पुराने सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड की पहचान बना।
Highlights
- 160 साल पहले पुणे में शुरू हुआ भारत का पहला कार्बोनेटेड सोडा कारोबार।
- ईरान से आए पारसी कारोबारी अर्देशिर खोदादाद ईरानी ने रखी थी नींव।
- ब्रिटिश सैनिकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ था यह सोडा।
- आज चौथी पीढ़ी Ardy’s (आर्डीज़) नाम से इस विरासत को आगे बढ़ा रही है।
- कांच की बोतलों और लॉजिस्टिक्स जैसी चुनौतियों के बावजूद ब्रांड अब भी कायम है।
Coca-Cola और Pepsi से पहले भारत में बन चुका था फिज़ी ड्रिंक
आज दुनिया भर में Coca-Cola और Pepsi का दबदबा है, लेकिन 19वीं सदी के दौरान इन ब्रांड्स का अस्तित्व भी नहीं था। उस समय भारत के पुणे शहर में एक पारसी कारोबारी ने कार्बोनेटेड सोडा बनाकर इतिहास रच दिया था।
करीब 1860 के दशक में ईरान से आए अर्देशिर खोदादाद ईरानी ने पुणे में कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक बनाना शुरू किया। उस दौर में यह भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के शुरुआती सोडा कारोबारों में गिना जाता था।
ईरान से भारत आने की कहानी
अर्देशिर खोदादाद ईरानी धार्मिक उत्पीड़न के कारण ईरान छोड़ने पर मजबूर हुए। पहले वे क्वेटा पहुंचे, जो उस समय ब्रिटिश भारत का हिस्सा था और आज पाकिस्तान में है। वहां से वे रोजगार की तलाश में मुंबई आए, लेकिन सफलता नहीं मिली।
इसके बाद उन्होंने पुणे का रुख किया, जहां ब्रिटिश सेना का बड़ा कैंप मौजूद था। यही शहर उनके कारोबार की शुरुआत का गवाह बना।
ब्रिटिश सैनिकों की जरूरत बनी कारोबार का मौका
उस समय पुणे कैंटोनमेंट में सोडा वॉटर की भारी मांग रहती थी। ब्रिटिश सैनिक दिनभर की ड्यूटी के बाद बार और कैंटीन में सोडा आधारित पेय पीना पसंद करते थे, लेकिन सप्लाई सीमित थी।
अर्देशिर ईरानी ने इस कमी को व्यापारिक अवसर के रूप में देखा। उन्होंने पानी में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) मिलाकर कार्बोनेटेड ड्रिंक तैयार करना शुरू किया। इसके लिए चारकोल आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था।
कुछ ही महीनों में बन गया सैनिकों का पसंदीदा ड्रिंक
शुरुआत में अर्देशिर सीमित मात्रा में सोडा तैयार करते थे और कैंप में सैनिकों तक पहुंचाते थे। यह ड्रिंक इतनी पसंद की गई कि शाम होते ही सैनिक इसका इंतजार करने लगे।
धीरे-धीरे मांग बढ़ती गई और अर्देशिर ने उत्पादन का दायरा बढ़ा दिया। पुणे कैंटोनमेंट और आसपास के इलाकों में उनकी सोडा कंपनी की अच्छी पहचान बन गई।
शरबतवाला चौक से शुरू हुई थी विरासत
अर्देशिर ईरानी ने पुणे के कैंटोनमेंट क्षेत्र स्थित शरबतवाला चौक के पास अपनी सोडा कंपनी स्थापित की। यहीं से भारत के सबसे पुराने सॉफ्ट ड्रिंक कारोबार की शुरुआत हुई।
यह कंपनी उस दौर में स्थानीय स्तर पर कार्बोनेटेड ड्रिंक तैयार करने वाली अग्रणी कंपनियों में शामिल थी।
आज भी जिंदा है 160 साल पुरानी विरासत
समय के साथ दुनिया में Coca-Cola, Pepsi और कई बड़े ब्रांड आ गए, लेकिन अर्देशिर ईरानी की विरासत पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
आज उनकी चौथी पीढ़ी के सदस्य मरज़बान ईरानी इस ब्रांड को Ardy’s (आर्डीज़) नाम से आगे बढ़ा रहे हैं। यह ब्रांड महाराष्ट्र के कई हिस्सों में आज भी उपलब्ध है और पुराने ग्राहकों के बीच इसकी अलग पहचान बनी हुई है।
कांच की बोतलें बनी सबसे बड़ी चुनौती
Ardy’s की सबसे खास बात यह है कि इसके उत्पाद आज भी कांच की बोतलों में ही बेचे जाते हैं।
हालांकि, यही इसकी सबसे बड़ी चुनौती भी है। कांच की बोतलों को लंबी दूरी तक भेजना और फिर वापस मंगाना महंगा और कठिन होता है। आमतौर पर इन्हें लगभग 200 किलोमीटर के दायरे तक ही प्रभावी तरीके से संचालित किया जा सकता है।
प्लास्टिक (PET) बोतलों का विकल्प मौजूद है, लेकिन कंपनी का मानना है कि इससे स्वाद, गुणवत्ता और पर्यावरण—तीनों पर असर पड़ सकता है।
नए फ्लेवर के साथ आगे बढ़ रहा है ब्रांड
बाजार में बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद Ardy’s लगातार नए फ्लेवर और उत्पाद पेश कर रहा है। कंपनी की कोशिश है कि पारंपरिक स्वाद को बरकरार रखते हुए आधुनिक ग्राहकों की पसंद के अनुसार नए विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।
यही वजह है कि 160 साल पुरानी यह विरासत आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और महाराष्ट्र में इसकी अलग पहचान कायम है।
भारत के सॉफ्ट ड्रिंक इतिहास में खास स्थान
अर्देशिर खोदादाद ईरानी की कहानी केवल एक कारोबारी सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत के शुरुआती उद्यमियों की दूरदर्शिता का भी उदाहरण है। जब दुनिया में बड़े ग्लोबल सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड मौजूद नहीं थे, तब एक ईरानी प्रवासी ने भारत में कार्बोनेटेड ड्रिंक का ऐसा कारोबार शुरू किया, जिसकी पहचान डेढ़ सदी बाद भी बनी हुई है।


