नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार नई ऊंचाइयों को छूने के बाद अब बुलियन बाजार में मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल रहा है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर सोना ₹6,438 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹14,326 प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई है। इस गिरावट ने निवेशकों और ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के पीछे केवल एक कारण नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों, ब्याज दरों की उम्मीदों और निवेशकों की मुनाफावसूली जैसे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं। हालांकि कीमतों में आई यह कमजोरी लंबे समय के निवेशकों के लिए अवसर भी मानी जा रही है।
एक हफ्ते में कितना सस्ता हुआ सोना?
IBJA के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत इस सप्ताह 1,54,238 रुपये प्रति 10 ग्राम से घटकर 1,47,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। यानी केवल सात दिनों में सोना 6,438 रुपये टूट गया।
इसी तरह 22 कैरेट सोने का भाव 1,41,282 रुपये से घटकर 1,35,385 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं 18 कैरेट सोना 1,15,679 रुपये से फिसलकर 1,10,850 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया।
सप्ताह के दौरान 11 जून को सोने ने 1,44,782 रुपये प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर भी छुआ, जबकि 9 जून को यह 1,52,519 रुपये तक पहुंचा था।
चांदी में और भी बड़ी गिरावट
सोने के मुकाबले चांदी में अधिक दबाव देखने को मिला। एक सप्ताह के भीतर चांदी का भाव 2,56,908 रुपये प्रति किलो से घटकर 2,42,582 रुपये प्रति किलो रह गया। यानी चांदी की कीमत में 14,326 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज हुई।
सप्ताह के दौरान चांदी का न्यूनतम स्तर 11 जून की शाम को 2,32,591 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि 9 जून को यह 2,45,938 रुपये प्रति किलो तक पहुंची थी।
चांदी में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत अधिक रहता है क्योंकि इसका उपयोग निवेश के साथ-साथ उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है।
आखिर क्यों टूटी सोने और चांदी की कीमत?
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में कई ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे निवेशकों ने सोने और चांदी में मुनाफावसूली शुरू कर दी।
पहला कारण वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता है। कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे दुनिया के कई देशों में मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
दूसरा बड़ा कारण ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें हैं। यदि प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखते हैं तो सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश पर दबाव बढ़ता है।
इसके अलावा पिछले एक वर्ष में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। ऐसे में कई बड़े निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का क्या असर पड़ा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर सोना करीब 4,248 डॉलर प्रति औंस और चांदी लगभग 68 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भी सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो आमतौर पर सोने की मांग कमजोर पड़ जाती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बाजार जानकारों का कहना है कि हालिया गिरावट को केवल कमजोरी के रूप में नहीं देखना चाहिए। सोना अभी भी वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई से बचाव का महत्वपूर्ण साधन माना जाता है।
यदि कीमतों में और नरमी आती है तो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चरणबद्ध खरीदारी का अवसर बन सकता है। वहीं अल्पकालिक निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और कच्चे तेल की चाल पर नजर रखनी चाहिए।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग फिर तेज हो सकती है। वहीं महंगाई और ब्याज दरों से जुड़े संकेत कमजोर पड़ने पर कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल बाजार में आई यह बड़ी गिरावट उन लोगों के लिए राहत की खबर है जो शादी-ब्याह या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे थे।


