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अब समंदर का किंग होगा भारत! मिल गया स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसा चोक प्वाइंट, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट कितना अहम?

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/28 at 8:02 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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10 Min Read
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नई दिल्ली। दुनिया की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार पर निर्भर करता है। तेल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्यान्न से लेकर औद्योगिक सामान तक ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्री मार्गों के जरिए ही होता है। यही वजह है कि जिन देशों का महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और बंदरगाहों पर प्रभाव होता है, उनकी वैश्विक ताकत भी बढ़ जाती है। हाल के वर्षों में दुनिया ने देखा कि किस तरह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तनाव बढ़ने से तेल बाजार और वैश्विक व्यापार प्रभावित हो गया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया कि समुद्री चोक प्वाइंट केवल भौगोलिक स्थान नहीं होते, बल्कि वे आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के केंद्र भी होते हैं।

Contents
क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट?मलक्का जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?भारत को आर्थिक रूप से क्या फायदा होगा?राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?चीन फैक्टर और इंडो-पैसिफिक रणनीतिरोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावापर्यावरणीय चुनौतियां भी हैं बड़ीकब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट?निष्कर्ष

इसी संदर्भ में भारत का ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के दक्षिणी छोर पर स्थित ग्रेट निकोबार द्वीप को केंद्र में रखकर तैयार की जा रही यह परियोजना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि भारत की दीर्घकालिक समुद्री रणनीति का अहम हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पूरा होने के बाद भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और प्रभाव दोनों को काफी मजबूत कर सकेगा।

क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट?

ग्रेट निकोबार आईलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट भारत सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है। नीति आयोग की परिकल्पना और विभिन्न सरकारी एजेंसियों की भागीदारी से विकसित की जा रही इस परियोजना में अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक टाउनशिप, ऊर्जा संयंत्र और विभिन्न लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का विकास शामिल है।

इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा गलाथिया बे में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है। यह पोर्ट ऐसे स्थान पर विकसित किया जा रहा है जहां से दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक मलक्का जलडमरूमध्य काफी नजदीक पड़ता है। यही भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

सरकार की योजना के अनुसार यहां आधुनिक शहरी सुविधाओं से युक्त एक नया शहर भी विकसित किया जाएगा। इसमें आवासीय क्षेत्र, अस्पताल, स्कूल, होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और ऊर्जा अवसंरचना शामिल होगी। परियोजना का उद्देश्य केवल बंदरगाह बनाना नहीं, बल्कि एक पूर्ण आर्थिक और लॉजिस्टिक्स हब तैयार करना है।

मलक्का जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

मलक्का जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यह हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर से जोड़ता है। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों के लिए ऊर्जा और व्यापारिक आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग के आंकड़ों के अनुसार दुनिया के समुद्री व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से संचालित होता है। रोजाना हजारों जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं। यदि किसी कारणवश यहां यातायात प्रभावित होता है तो उसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

ग्रेट निकोबार की स्थिति इस जलडमरूमध्य के बेहद करीब है। यही कारण है कि यहां विकसित होने वाला बंदरगाह भारत को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के निकट रणनीतिक बढ़त प्रदान कर सकता है। विशेषज्ञ इसे भारत के लिए भविष्य का समुद्री गेम चेंजर मानते हैं।

भारत को आर्थिक रूप से क्या फायदा होगा?

आज भारत का एक बड़ा हिस्सा कंटेनर ट्रैफिक सीधे भारतीय बंदरगाहों से वैश्विक गंतव्य तक नहीं जाता। इसके बजाय उसे पहले सिंगापुर, कोलंबो या अन्य विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब तक भेजा जाता है, जहां कंटेनरों की अदला-बदली होती है।

इस व्यवस्था के कारण भारत को हर साल बड़ी मात्रा में विदेशी बंदरगाहों पर शुल्क और लॉजिस्टिक्स खर्च करना पड़ता है। यदि ग्रेट निकोबार में विश्वस्तरीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट विकसित हो जाता है तो भारत स्वयं क्षेत्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

इससे कई आर्थिक लाभ मिल सकते हैं। विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता घटेगी, शिपिंग लागत कम होगी, निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और बंदरगाह शुल्क से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, शिप रिपेयर, समुद्री सेवाओं और संबंधित उद्योगों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना सफल रहती है तो भारत हिंद महासागर क्षेत्र में सिंगापुर और कोलंबो जैसे प्रमुख समुद्री केंद्रों को चुनौती देने की स्थिति में आ सकता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का महत्व केवल आर्थिक नहीं है। इसका बड़ा सामरिक पहलू भी है। हिंद महासागर क्षेत्र भारत की सुरक्षा और विदेश नीति दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच मजबूत समुद्री उपस्थिति भारत के लिए आवश्यक मानी जाती है।

ग्रेट निकोबार में आधुनिक बंदरगाह, हवाई अड्डा और अन्य अवसंरचना विकसित होने से भारतीय नौसेना और वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ सकती है। इससे समुद्री निगरानी, आपदा प्रबंधन, खोज एवं बचाव अभियानों और रणनीतिक प्रतिक्रिया की गति में सुधार होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि हिंद महासागर में मजबूत उपस्थिति भारत को समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी। साथ ही समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी यह परियोजना अहम भूमिका निभा सकती है।

चीन फैक्टर और इंडो-पैसिफिक रणनीति

पिछले कुछ वर्षों में चीन ने हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने बंदरगाह नेटवर्क का विस्तार किया है। पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह, श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट और म्यांमार में विकसित हो रही परियोजनाओं को अक्सर इसी रणनीति के संदर्भ में देखा जाता है।

भारत भी अब अपने समुद्री बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को कई रणनीतिक विश्लेषक भारत की दीर्घकालिक समुद्री रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। इससे भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने और क्षेत्रीय समुद्री संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक और लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाना है, लेकिन इसके रणनीतिक लाभ भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं।

रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

इतनी बड़ी परियोजना का असर केवल समुद्री व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इसके निर्माण और संचालन से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

निर्माण क्षेत्र, परिवहन, पर्यटन, होटल उद्योग, लॉजिस्टिक्स, समुद्री सेवाएं और स्थानीय व्यापार गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं और निजी निवेश को भी आकर्षित किया जा सकता है।

सरकार का मानना है कि यह परियोजना अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

पर्यावरणीय चुनौतियां भी हैं बड़ी

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों ने कुछ चिंताएं भी जताई हैं। यह क्षेत्र जैव विविधता के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां कई दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियां और पारिस्थितिक तंत्र मौजूद हैं।

कुछ पर्यावरण समूहों का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। वहीं सरकार का कहना है कि परियोजना को आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियों और संरक्षण उपायों के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन किस तरह कायम रखा जाता है।

कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट?

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को कई चरणों में विकसित किया जाना है। पहले चरण में अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और प्रमुख बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है। सरकारी योजनाओं के अनुसार पहले चरण को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके बाद परियोजना का विस्तार विभिन्न चरणों में किया जाएगा। पूर्ण विकसित टाउनशिप, औद्योगिक क्षेत्र, पर्यटन सुविधाएं और विस्तारित बंदरगाह अवसंरचना को 2050 तक विकसित किए जाने की योजना है।

निष्कर्ष

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट केवल एक बंदरगाह या हवाई अड्डा परियोजना नहीं है, बल्कि भारत की समुद्री महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है। मलक्का जलडमरूमध्य के निकट इसकी रणनीतिक स्थिति इसे विशेष महत्व देती है। यदि यह परियोजना तय समय पर सफलतापूर्वक पूरी हो जाती है तो भारत न केवल समुद्री व्यापार में अपनी भूमिका मजबूत कर सकेगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को भी नई ऊंचाई पर पहुंचा सकता है। आने वाले दशकों में यह परियोजना भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति दोनों को मजबूत करने वाले सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेशों में से एक साबित हो सकती है।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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