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रूस पर EU का नया शिकंजा, भारत-चीन समेत 6 देशों की 50 कंपनियां निशाने पर, तेल और LNG व्यापार पर भी सख्ती

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/10 at 4:19 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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6 Min Read
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नई दिल्ली: यूरोपीय संघ (EU) रूस के खिलाफ अपना 21वां प्रतिबंध पैकेज लागू करने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्तावित पैकेज के तहत भारत, चीन, तुर्किये, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित लगभग 50 कंपनियों पर नए निर्यात-नियंत्रण (Export Control) प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। यूरोपीय अधिकारियों का आरोप है कि ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे को सहयोग पहुंचा रही हैं और मौजूदा प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद कर रही हैं।

Contents
किन देशों की कंपनियां निशाने पर?ड्रोन उद्योग और सैन्य आपूर्ति श्रृंखला पर भी फोकसरूसी तेल और LNG व्यापार पर सख्तीभारत पर क्या पड़ सकता है असर?बैंकों, व्यापारियों और क्रिप्टो ऑपरेटरों पर भी नजरअंतिम मंजूरी का इंतजारआज के लाइव रेट्स

हालांकि इस पैकेज को लागू करने से पहले यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों की मंजूरी आवश्यक होगी। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही ये प्रतिबंध प्रभावी होंगे।

किन देशों की कंपनियां निशाने पर?

यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कैलास (Kaja Kallas) के अनुसार प्रस्तावित प्रतिबंधों में कई देशों में स्थित कंपनियां शामिल हैं। इनमें भारत, चीन, तुर्किये, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात प्रमुख हैं।

यूरोपीय संघ का कहना है कि रूस पर पहले से लागू प्रतिबंधों के बावजूद कुछ कंपनियां ऐसे उत्पादों और तकनीकों की आपूर्ति में शामिल हैं जिनका उपयोग रूसी रक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जा सकता है। इसी वजह से इन कंपनियों को नई सूची में शामिल करने की तैयारी की गई है।

ड्रोन उद्योग और सैन्य आपूर्ति श्रृंखला पर भी फोकस

नए प्रतिबंध पैकेज में रूस के ड्रोन निर्माण क्षेत्र से जुड़े 30 से अधिक व्यक्तियों और संस्थाओं को भी सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव है। यूरोपीय संघ का मानना है कि यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए उसकी आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ाना जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में रूस ने वैकल्पिक व्यापारिक नेटवर्क विकसित किए हैं, जिनके जरिए वह पश्चिमी प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहा है। नया पैकेज इन्हीं नेटवर्कों को निशाना बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

रूसी तेल और LNG व्यापार पर सख्ती

यूरोपीय संघ इस बार रूस के ऊर्जा कारोबार पर भी अतिरिक्त दबाव बनाने की तैयारी में है। प्रस्ताव के अनुसार पहले से प्रतिबंधित 632 जहाजों के अलावा लगभग 30 नए जहाजों को भी प्रतिबंध सूची में शामिल किया जा सकता है।

इसके अलावा पहली बार उन जहाजों और सेवा प्रदाताओं को भी निशाना बनाया जाएगा जो रूस के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ को सहायता प्रदान करते हैं। शैडो फ्लीट उन जहाजों के नेटवर्क को कहा जाता है जिनका उपयोग रूस प्रतिबंधों के बावजूद तेल निर्यात जारी रखने के लिए करता है।

प्रस्ताव में रूसी तेल व्यापार या प्रसंस्करण से जुड़े कुछ बंदरगाहों, हवाई अड्डों और रिफाइनरियों पर कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है। साथ ही रूस को LNG टैंकरों की बिक्री पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की योजना है।

भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूस से रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित प्रतिबंधों का भारतीय ऊर्जा आयात पर कितना प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा। लेकिन यदि रूस के तेल परिवहन नेटवर्क और संबंधित कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। इसका असर तेल परिवहन लागत और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता बनाए रखी है। इसलिए किसी भी संभावित व्यवधान की स्थिति में वैकल्पिक आपूर्ति चैनलों का उपयोग किया जा सकता है।

बैंकों, व्यापारियों और क्रिप्टो ऑपरेटरों पर भी नजर

नए पैकेज में उन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रस्ताव है जिनका उपयोग रूस राजस्व जुटाने या प्रतिबंधों से बचने के लिए कर रहा है। इसमें तीसरे देशों में स्थित बैंक, हथियार निर्माता, तेल व्यापारी, रिफाइनरियां और कुछ क्रिप्टोकरेंसी ऑपरेटर शामिल हो सकते हैं।

यूरोपीय संघ का उद्देश्य रूस के लिए वित्तीय और व्यापारिक विकल्पों को सीमित करना है ताकि उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके।

अंतिम मंजूरी का इंतजार

फिलहाल यह प्रस्ताव चर्चा के चरण में है और इसे लागू करने के लिए यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों की सहमति आवश्यक होगी। यदि मंजूरी मिलती है तो यह रूस के खिलाफ अब तक के सबसे व्यापक प्रतिबंध पैकेजों में से एक माना जाएगा, जिसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ सकता है।

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TAGGED: China, EU Sanctions, European Union, global trade, INDIA, Kaja Kallas, LNG, Russia, Russia Ukraine War, Russian Oil, turkey
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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