शेयर बाजार में दिनभर की तेजी आखिरी घंटे में गायब हो गई। सेंसेक्स मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ जबकि निफ्टी गिरावट में रहा। जानिए किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट और तेजी रही।
आखिरी घंटे की बिकवाली ने बिगाड़ा बाजार का मूड
दिनभर मजबूती दिखाने के बाद घरेलू शेयर बाजार ने बुधवार को निवेशकों को चौंका दिया। कारोबार के अधिकांश समय तक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी हरे निशान में कारोबार करते रहे। सेंसेक्स एक समय करीब 700 अंक तक उछल गया था जबकि निफ्टी 23,350 के स्तर को पार कर गया था। हालांकि बाजार बंद होने से ठीक पहले तेज बिकवाली देखने को मिली, जिसके कारण दिनभर की अधिकांश बढ़त खत्म हो गई।
अंत में बीएसई सेंसेक्स 64.42 अंक यानी 0.09 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 73,983.18 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 इंडेक्स 27.15 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,214.95 अंक पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली के कारण अंतिम घंटे में दबाव बढ़ा।
बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 20 शेयर लाल निशान में बंद हुए, जिससे स्पष्ट संकेत मिला कि निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में बिकवाली को प्राथमिकता दी। व्यापक बाजार यानी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में इटरनल, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, टाइटन, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल और एनटीपीसी शामिल रहे। इटरनल में करीब 2.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तरफ हिंदुस्तान यूनिलीवर, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और आईटीसी जैसे शेयरों ने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया।
निफ्टी के सेक्टोरल प्रदर्शन पर नजर डालें तो धातु और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में दबाव सबसे ज्यादा रहा। हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, कोल इंडिया और ओएनजीसी निफ्टी के सबसे कमजोर शेयरों में शामिल रहे। वहीं एफएमसीजी और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
ब्रॉडर मार्केट में कमजोरी ज्यादा स्पष्ट रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.49 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.33 प्रतिशत तक फिसल गया। यह दर्शाता है कि निवेशक फिलहाल जोखिम वाले शेयरों से दूरी बना रहे हैं। जब मिडकैप और स्मॉलकैप में बड़ी गिरावट आती है तो इसे बाजार की व्यापक कमजोरी का संकेत माना जाता है।
सेक्टर आधारित प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स दबाव में रहे। दूसरी ओर निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी केमिकल इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली। इससे साफ है कि निवेशक फिलहाल डिफेंसिव सेक्टरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बाजार पर वैश्विक घटनाक्रमों का भी असर देखने को मिला। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और ईरान की प्रतिक्रिया की आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में वैश्विक फंड आमतौर पर जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 91.27 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। वहीं इंडियन बास्केट की कीमत करीब 4.77 प्रतिशत गिरकर 92.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सकारात्मक मानी जाती है क्योंकि इससे आयात बिल और महंगाई पर दबाव कम हो सकता है।
विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने मजबूती दिखाई। रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 0.1 प्रतिशत मजबूत होकर 95.2650 पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.35 पर बंद हुआ था। रुपये की मजबूती से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है और आयात आधारित कंपनियों को राहत मिल सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है तो भारतीय बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। वहीं तेल की कीमतों में और गिरावट आती है तो बाजार को समर्थन मिल सकता है।
फिलहाल बाजार का रुझान यह संकेत देता है कि निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली कर रहे हैं और नई खरीदारी के लिए स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। इसलिए अगले कुछ सत्रों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।


