नई दिल्ली: देश में तेजी से सड़क नेटवर्क बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब 28 नेशनल हाईवे एसेट्स को मोनेटाइज करने की तैयारी कर रही है। इन हाईवे प्रोजेक्ट्स की कुल लंबाई 1,800 किलोमीटर से ज्यादा बताई जा रही है और इनके जरिए करीब 35,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
सूत्रों के मुताबिक इस लिस्ट में सबसे ज्यादा सड़क परियोजनाएं हरियाणा और उत्तर प्रदेश से जुड़ी हैं। सरकार इन एसेट्स को पब्लिक-प्राइवेट मॉडल के तहत मोनेटाइज करेगी, ताकि नए एक्सप्रेसवे, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और लॉजिस्टिक नेटवर्क के लिए पूंजी जुटाई जा सके।
यह पूरा अभियान केंद्र सरकार की नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (NMP) 2.0 रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत अगले पांच साल में हाईवे सेक्टर से 4.42 लाख करोड़ रुपये जुटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
क्या होता है हाईवे मोनेटाइजेशन?
हाईवे मोनेटाइजेशन का मतलब यह नहीं होता कि सरकार सड़कें बेच रही है। इसमें सरकार पहले से तैयार और चालू राष्ट्रीय राजमार्गों के संचालन और टोल कलेक्शन का अधिकार तय समय के लिए निजी कंपनियों या निवेशकों को देती है। इसके बदले सरकार को एकमुश्त बड़ी रकम मिलती है, जिसका इस्तेमाल नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में किया जाता है।
सरकार इस प्रक्रिया के लिए मुख्य रूप से दो मॉडल का इस्तेमाल कर रही है टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT), इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) इन दोनों मॉडल्स में निवेशकों को लंबी अवधि तक टोल रेवेन्यू से कमाई का मौका मिलता है, जबकि सरकार को तुरंत फंड उपलब्ध हो जाता है।
हरियाणा और यूपी क्यों हैं सबसे ऊपर?
सरकारी सूत्रों के अनुसार जिन 28 हाईवे एसेट्स की पहचान की गई है, उनमें सबसे ज्यादा सड़कें हरियाणा और उत्तर प्रदेश में मौजूद हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इन राज्यों में:
- ट्रैफिक वॉल्यूम बहुत ज्यादा है
- इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तेजी से बढ़ रहे हैं
- दिल्ली-NCR से कनेक्टिविटी मजबूत है
- एक्सप्रेसवे और फ्रेट मूवमेंट लगातार बढ़ रहा है
विशेषज्ञ मानते हैं कि जहां ट्रैफिक ज्यादा होता है, वहां टोल रेवेन्यू भी अधिक मिलता है। इसी कारण निजी निवेशकों की दिलचस्पी ऐसे हाईवे प्रोजेक्ट्स में ज्यादा रहती है।
सरकार को क्यों चाहिए इतना बड़ा फंड?
भारत इस समय दुनिया के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार कार्यक्रमों में से एक पर काम कर रहा है। केंद्र सरकार नए एक्सप्रेसवे बना रही है, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क विकसित कर रही है, बॉर्डर रोड नेटवर्क मजबूत कर रही है, औद्योगिक कॉरिडोर तैयार कर रही है
इन सभी परियोजनाओं के लिए भारी निवेश की जरूरत है। ऐसे में सरकार पुरानी और चालू परियोजनाओं से पैसा जुटाकर नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करना चाहती है। इसी रणनीति को “Asset Recycling” कहा जाता है।
कौन-कौन से प्रोजेक्ट शामिल होंगे?
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल के मोनेटाइजेशन कार्यक्रम में 2 बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) प्रोजेक्ट, 7 इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) प्रोजेक्ट शामिल किए जाएंगे।
इसके अलावा सरकार हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) वाले प्रोजेक्ट्स को भी प्राथमिकता दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार HAM मॉडल में जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है, इसलिए विदेशी निवेशकों और पेंशन फंड्स की रुचि इसमें तेजी से बढ़ रही है।
विदेशी निवेशकों को भी मिला मौका
हाल ही में केंद्र सरकार ने सॉवरेन वेल्थ फंड्स और पेंशन फंड्स को सीधे ग्रीनफील्ड टोल रोड प्रोजेक्ट्स में निवेश की अनुमति दी है। इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि कनाडा, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, और मिडिल ईस्ट के बड़े फंड्स
भारतीय सड़क परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का हाईवे सेक्टर लंबे समय में स्थिर रिटर्न देने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट माना जा रहा है।
पहले भी सरकार को मिला बड़ा फायदा
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को वित्त वर्ष 2025-26 में मोनेटाइजेशन से करीब 29,000 करोड़ रुपये की आय हुई थी। इसी साल मंत्रालय ने चार राज्यों में पांच हाईवे सेक्शंस को मोनेटाइज किया था, जिनकी कुल लंबाई 260 किलोमीटर से ज्यादा थी। यह मंत्रालय का पहला पब्लिक InvIT था, जिससे सरकार को 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम मिली थी।
इस सफलता के बाद अब सरकार बड़े पैमाने पर हाईवे एसेट मोनेटाइजेशन बढ़ाने की योजना बना रही है।
पांच साल का रोड एसेट मोनेटाइजेशन टारगेट
| वित्त वर्ष | लक्ष्य |
|---|---|
| FY 2026 | ₹59,140 करोड़ |
| FY 2027 | ₹68,770 करोड़ |
| FY 2028 | ₹91,800 करोड़ |
| FY 2029 | ₹1,04,430 करोड़ |
| FY 2030 | ₹1,17,860 करोड़ |
सरकार का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में हाईवे मोनेटाइजेशन से मिलने वाला रेवेन्यू लगातार बढ़ेगा।
आम लोगों को क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों के मुताबिक इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सरकार को नए हाईवे और एक्सप्रेसवे बनाने के लिए अतिरिक्त पूंजी मिलेगी। इससे यात्रा समय कम होगा, लॉजिस्टिक लागत घटेगी, औद्योगिक विकास तेज होगा, रोजगार बढ़ेंगे, राज्यों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी इसके अलावा बेहतर सड़क नेटवर्क से ई-कॉमर्स, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि सप्लाई चेन को भी बड़ा फायदा मिल सकता है।
अगले चरण की तैयारी शुरू
सरकार की योजना अगले तीन से पांच वर्षों में करीब 1,500 किलोमीटर अतिरिक्त सड़कों को भी पब्लिक InvIT के तहत लाने की है। फरवरी 2026 में लॉन्च की गई नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 के तहत हाईवे सेक्टर को सबसे महत्वपूर्ण सेक्टर माना गया है। सरकार को उम्मीद है कि सिर्फ FY27 में ही हाईवे मोनेटाइजेशन से 68,770 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल रहती है, तो भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े रोड इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क वाले देशों में शामिल हो सकता है।
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