Honda Motor Co. ने ग्लोबल फाइनेंशियल संकट, महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और कई बड़े इंडस्ट्री संकटों का सामना किया, लेकिन इस बार कंपनी जिस मुश्किल में फंसी है, वैसी चुनौती उसे अपने इतिहास में शायद ही कभी मिली हो। अमेरिका में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार की बदलती दिशा ने Honda की पूरी रणनीति हिला दी है।
कंपनी ने हाल ही में करीब 2.7 अरब डॉलर के नुकसान की रिपोर्ट दी है। यह नुकसान मुख्य रूप से उन EV प्रोजेक्ट्स को बंद करने से हुआ है जिन पर Honda अरबों डॉलर खर्च कर चुकी थी। यही वजह है कि कंपनी को बतौर पब्लिक कंपनी अपने इतिहास का पहला सालाना घाटा झेलना पड़ा।
EV पर बड़ा दांव, लेकिन बाजार बदल गया
Honda ने पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका को ध्यान में रखते हुए आक्रामक EV रणनीति बनाई थी। कंपनी को उम्मीद थी कि अगले दशक तक अमेरिका में नई कारों की बिक्री का बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहनों का होगा।
उस समय अमेरिका में बाइडेन प्रशासन EV को तेजी से बढ़ावा दे रहा था। कड़े उत्सर्जन नियम और सरकारी प्रोत्साहन देखकर Honda ने भारी निवेश शुरू कर दिया।
लेकिन बाद में अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव आया। राष्ट्रपति Donald Trump ने EV अनिवार्यता जैसी नीतियों का विरोध किया। इसके बाद अमेरिकी बाजार में EV की रफ्तार उम्मीद से काफी धीमी पड़ गई।
Honda के सीईओ Toshihiro Mibe के मुताबिक कंपनी को उम्मीद थी कि अमेरिका में EV की हिस्सेदारी करीब 15% तक पहुंच जाएगी, लेकिन फिलहाल यह आंकड़ा लगभग 6% के आसपास है।
10 अरब डॉलर की EV योजना रद्द
Honda ने केवल EV मॉडल लॉन्च करने की घोषणा ही नहीं की थी, बल्कि कंपनी ने प्रोडक्शन डिजाइन, फैक्ट्री मशीनरी और सप्लाई चेन तक तैयार कर ली थी।
अब कंपनी को इनमें से कई बड़े प्रोजेक्ट बंद करने पड़े हैं। इनमें शामिल हैं ओहायो में बनने वाले 3 नए EV मॉडल, कनाडा मे, प्रस्तावित 11 अरब डॉलर का EV और बैटरी कॉम्प्लेक्स, 2040 तक पेट्रोल इंजन बंद करने की योजना इन फैसलों से Honda को भारी write-down और वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
अब Hybrid Cars पर फोकस करेगी Honda
Honda अब पूरी तरह EV पर निर्भर रहने के बजाय Hybrid तकनीक की ओर लौट रही है। कंपनी ने कहा है कि वह 2027 से उत्तरी अमेरिका के लिए नई Hybrid Sedan और SUV लॉन्च करेगी। इसके बाद 2030 तक दुनियाभर में एक दर्जन से ज्यादा Hybrid मॉडल लाने की योजना है।
यह रणनीति इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि अमेरिकी ग्राहकों में अभी भी Hybrid कारों की मांग EV से ज्यादा स्थिर दिखाई दे रही है।
Hybrid वाहन पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे ईंधन की बचत होती है और पूरी तरह EV इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता भी नहीं रहती।
चीन और Tesla से बढ़ा खतरा
Honda की सबसे बड़ी चुनौती अब सिर्फ अमेरिकी बाजार नहीं बल्कि चीन भी बन चुका है। Tesla और चीन की नई EV कंपनियां तेजी से ऑटो टेक्नोलॉजी में आगे निकल चुकी हैं। इनमें सॉफ्टवेयर, बैटरी टेक्नोलॉजी, autonomous driving और स्मार्ट फीचर्स शामिल हैं।
कभी fuel-efficient और भरोसेमंद कारों के लिए मशहूर Honda अब EV innovation में पीछे मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Honda ने EV transition में काफी देर कर दी। जब कंपनी ने तेजी से निवेश शुरू किया, तब तक चीनी कंपनियां बाजार में मजबूत पकड़ बना चुकी थीं।
Honda-GM पार्टनरशिप भी उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं रही
Honda ने EV टेक्नोलॉजी में तेजी लाने के लिए General Motors के साथ साझेदारी की थी। इस साझेदारी से बनी पहली EV SUV “Prologue” बाजार में आई। शुरुआत में इसकी बिक्री अच्छी रही और यह 2025 की सबसे ज्यादा बिकने वाली EVs में शामिल रही।
लेकिन बाद में इसकी बिक्री तेजी से गिर गई। रिपोर्ट्स के अनुसार इस साल शुरुआती महीनों में इसकी बिक्री पिछले साल की तुलना में आधे से भी कम रह गई।
Honda की सबसे बड़ी गलती क्या रही?
विश्लेषकों के मुताबिक Honda की सबसे बड़ी समस्या यह रही कि उसने EV transition के लिए अपनी पारंपरिक ताकत कमजोर कर दी। कंपनी ने अरबों डॉलर EV प्रोजेक्ट्स में लगाए और उसी दौरान पेट्रोल इंजन बिजनेस में निवेश कम कर दिया। जबकि Honda की सबसे बड़ी पहचान हमेशा उसके भरोसेमंद इंजन और fuel-efficient कारें रही हैं।
अब कंपनी फिर से उसी ताकत की ओर लौटने की कोशिश कर रही है।
क्या Honda वापसी कर पाएगी?
Honda अभी भी दुनिया की सबसे बड़ी ऑटो कंपनियों में शामिल है और उसके पास मजबूत ब्रांड वैल्यू, ग्लोबल नेटवर्क और इंजीनियरिंग क्षमता मौजूद है।
लेकिन चुनौती आसान नहीं होगी क्योंकि:
- चीन की कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं
- EV टेक्नोलॉजी लगातार बदल रही है
- अमेरिकी नीतियां अस्थिर बनी हुई हैं
- Tesla जैसी कंपनियां सॉफ्टवेयर आधारित कारों में बढ़त बना चुकी हैं
Honda अब “सिर्फ EV” रणनीति छोड़कर flexible approach अपनाना चाहती है। कंपनी का कहना है कि वह ऐसी तकनीक विकसित करेगी जिससे जरूरत पड़ने पर EV और Hybrid दोनों बाजारों में तेजी से बदलाव किया जा सके।
Honda Crisis क्यों महत्वपूर्ण है?
Honda का संकट सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं है। यह पूरी ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री के बदलते दौर की तस्वीर दिखाता है। EV transition जितना आसान दिख रहा था, वास्तविकता उतनी सरल नहीं निकली। कई कंपनियां अब पूरी तरह EV की जगह Hybrid और multi-technology strategy की ओर लौट रही हैं।
Honda की स्थिति यह भी दिखाती है कि सिर्फ भविष्य की तकनीक पर दांव लगाना काफी नहीं होता, बाजार की वास्तविक मांग और सरकारी नीतियों का संतुलन भी उतना ही जरूरी है।
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