देश में एक बार फिर रसोई का बजट तेजी से बिगड़ता नजर आ रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में रोजमर्रा की जरूरत की कई चीजों के दाम बढ़ गए हैं। खाने के तेल, मसाले, चायपत्ती, चावल और सूखे राशन के सामानों में 10 से 30 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली है। पहले पेट्रोल-डीजल और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता बढ़ाई थी, लेकिन अब रसोई में इस्तेमाल होने वाली बुनियादी चीजें भी महंगी हो गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर अब सीधे भारतीय बाजारों में दिखाई देने लगा है। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से थोक और खुदरा बाजार दोनों प्रभावित हुए हैं। आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। ऐसे में आम आदमी की जेब पर दबाव और बढ़ने की आशंका है।
दो महीने में तेजी से बढ़े दाम
स्थानीय बाजारों और व्यापारियों के मुताबिक, बीते दो महीनों में कई जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़े हैं। खासकर मसाले, खाद्य तेल और चायपत्ती में बड़ा उछाल देखने को मिला है। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वाले परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ रहा है।
जरूरी सामानों की ताजा रेट लिस्ट
| सामान | पुराने दाम | नए दाम |
|---|---|---|
| मूंगफली | ₹160 प्रति किलो | ₹200 प्रति किलो |
| रिफाइंड ऑयल | ₹135 प्रति लीटर | ₹148 प्रति लीटर |
| सरसों तेल | ₹170 प्रति लीटर | ₹190 प्रति लीटर |
| चावल | ₹60-120 प्रति किलो | ₹70-130 प्रति किलो |
| जीरा | ₹300 प्रति किलो | ₹360 प्रति किलो |
| चायपत्ती | ₹500 प्रति किलो | ₹545 प्रति किलो |
| सूखा धनिया | ₹180 प्रति किलो | ₹220 प्रति किलो |
| लाल मिर्च | ₹300 प्रति किलो | ₹350 प्रति किलो |
| हल्दी पाउडर | ₹210 प्रति किलो | ₹250 प्रति किलो |
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं राशन के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार, महंगाई बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। इस संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है तो उसका असर ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग और उत्पादन लागत पर पड़ता है। यही वजह है कि खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी तेजी से बढ़ने लगती हैं।
इसके अलावा कई मसालों और खाद्य तेलों की सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि माल ढुलाई महंगी होने से थोक बाजार में लागत बढ़ी है, जिसका बोझ अब उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।
थोक महंगाई 9 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की डायरेक्टर मेघा अरोड़ा ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में थोक महंगाई दर और बढ़ सकती है। उनके मुताबिक, अगर ऊर्जा कीमतों में तेजी जारी रहती है तो थोक महंगाई 9 फीसदी तक पहुंच सकती है।
उन्होंने कहा कि ऊंची ऊर्जा कीमतों का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है। ट्रांसपोर्ट, निर्माण, कृषि और FMCG सेक्टर तक इसकी मार पहुंचती है।
खुदरा महंगाई दर में भी बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर यानी CPI बढ़कर 3.48 फीसदी पर पहुंच गई। मार्च 2026 में यह 3.40 फीसदी थी। हालांकि यह अभी रिजर्व बैंक के तय दायरे में है, लेकिन लगातार बढ़ती खाद्य कीमतें आने वाले महीनों में चिंता बढ़ा सकती हैं।
मई 2026 के महंगाई आंकड़े जून में जारी किए जाएंगे। अर्थशास्त्रियों की नजर अब खासतौर पर खाद्य और ईंधन महंगाई पर बनी हुई है।
आम आदमी के बजट पर कितना असर?
राशन की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। जिन परिवारों का मासिक खर्च सीमित है, उनके लिए हर महीने किराना बिल बढ़ता जा रहा है।
अगर किसी परिवार का मासिक राशन बजट पहले ₹5,000 था, तो अब वही खर्च बढ़कर ₹6,000 से ₹6,500 तक पहुंच सकता है। तेल, मसाले और चाय जैसी चीजें हर घर की जरूरत हैं, इसलिए इनके दाम बढ़ने से बचत पर सीधा असर पड़ता है।
आगे और बढ़ सकती है महंगाई?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट संकट लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
विशेष रूप से:
- खाद्य तेल
- दालें
- पैकेज्ड फूड
- डेयरी प्रोडक्ट
- ट्रांसपोर्ट सेवाएं
इनकी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
महंगाई को कंट्रोल करना सरकार और रिजर्व बैंक दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक तरफ वैश्विक संकट है, दूसरी तरफ घरेलू मांग और सप्लाई का दबाव। अगर ईंधन कीमतों में तेजी जारी रहती है तो इसका असर आने वाले त्योहारों के सीजन में और ज्यादा दिखाई दे सकता है।
फिलहाल आम लोगों को अपने घरेलू बजट को और सावधानी से मैनेज करना पड़ सकता है, क्योंकि आने वाले महीनों में महंगाई से राहत मिलती नजर नहीं आ रही।
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