भारत में ऊर्जा बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल के महीनों में कई बार बिजली और ऊर्जा बचाने की अपील कर चुके हैं। इसी बीच भारतीय रेलवे की एक व्यवस्था को लेकर नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और जाने-माने अर्थशास्त्री Rajiv Kumar ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने रेलवे स्टेशन पर अपने एक अनुभव को साझा करते हुए इसे “ऊर्जा की बर्बादी” और “ध्वनि प्रदूषण” तक बता दिया।
यह मामला सिर्फ एक ट्रेन के दरवाजे बंद होने का नहीं है, बल्कि सरकारी सिस्टम में संसाधनों के उपयोग, सार्वजनिक सुविधाओं और यात्रियों के अनुभव से जुड़ा बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। खास बात यह है कि यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश में ऊर्जा बचत को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चलाने की बात हो रही है।
काठगोदाम स्टेशन पर क्या हुआ?
Sitting at platform no 1 of Kathgodam railway station. Waiting to get inside the train New Delhi Shatabdi (12039) which is firmly locked. In the meantime a public announcement has been started telling us that this train is on platform no 1 (which we know ) and that we should…
— Rajiv Kumar (@RajivKumar1) May 16, 2026 राजीव कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि वह उत्तराखंड के काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर ‘नई दिल्ली शताब्दी’ ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर खड़ी थी, लेकिन उसके दरवाजे अंदर से बंद थे। ऐसे में यात्री ट्रेन में प्रवेश ही नहीं कर पा रहे थे।
उन्होंने लिखा कि वह प्लेटफॉर्म पर बैठे ट्रेन के अंदर जाने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन इसी दौरान लगातार तेज आवाज में अनाउंसमेंट किया जा रहा था कि ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर खड़ी है और यात्री अपनी सीटों पर जाकर बैठ जाएं। जबकि वास्तविक स्थिति यह थी कि यात्री ट्रेन में चढ़ ही नहीं पा रहे थे।
राजीव कुमार ने इस पूरे अनुभव को बेहद परेशान करने वाला बताया। उनके अनुसार करीब 20 मिनट तक लगातार एक ही घोषणा दोहराई जाती रही।
“ऊर्जा की बर्बादी और ध्वनि प्रदूषण”
पूर्व नीति आयोग उपाध्यक्ष ने कहा कि इस तरह का लगातार अनाउंसमेंट कई स्तर पर समस्या पैदा करता है। उनका कहना था कि:
- लगातार लाउडस्पीकर चलाना ऊर्जा की अनावश्यक खपत है
- बार-बार एक ही घोषणा करना यात्रियों के लिए परेशानी बन जाता है
- यह ध्वनि प्रदूषण को बढ़ाता है
- रेलवे के संचालन में समन्वय की कमी दिखती है
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऊर्जा बचत अपील का भी जिक्र किया और कहा कि जब देश स्तर पर बिजली और ऊर्जा बचाने की बात हो रही है, तब इस तरह की व्यवस्थाएं उस उद्देश्य के विपरीत नजर आती हैं।
रेलवे स्टेशन पर अनाउंसमेंट सिस्टम क्यों जरूरी होता है?
भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है। हर दिन करोड़ों यात्री रेलवे स्टेशनों का उपयोग करते हैं। ऐसे में अनाउंसमेंट सिस्टम यात्रियों को जानकारी देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। प्लेटफॉर्म बदलने, ट्रेन लेट होने, सुरक्षा निर्देश और कोच पोजिशन जैसी सूचनाएं इसी सिस्टम के जरिए दी जाती हैं।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यात्रियों की ओर से यह शिकायत भी लगातार सामने आती रही है कि कई स्टेशनों पर:
- जरूरत से ज्यादा अनाउंसमेंट होते हैं
- आवाज बहुत तेज होती है
- एक ही संदेश बार-बार दोहराया जाता है
- रात के समय भी शोर बना रहता है
विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल डिस्प्ले और मोबाइल सूचना प्रणाली के बढ़ते उपयोग के बाद रेलवे को अपने पारंपरिक अनाउंसमेंट सिस्टम को अधिक स्मार्ट और जरूरत आधारित बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
क्या रेलवे में ऊर्जा बचत बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है?
भारत में रेलवे देश के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में शामिल है। रेलवे स्टेशन, कोच, सिग्नलिंग सिस्टम, प्लेटफॉर्म लाइटिंग, एसी वेटिंग हॉल और सार्वजनिक अनाउंसमेंट सिस्टम में भारी मात्रा में बिजली की खपत होती है।
बीते कुछ वर्षों में भारतीय रेलवे ने कई ऊर्जा बचत योजनाओं पर काम किया है, जिनमें शामिल हैं LED लाइटिंग, सोलर पावर प्रोजेक्ट, ऊर्जा कुशल लोकोमोटिव, स्मार्ट स्टेशन मैनेजमेंट, ऑटोमेटेड इलेक्ट्रिक सिस्टम इसके बावजूद छोटे-छोटे स्तर पर होने वाली बिजली की बर्बादी पर अक्सर कम ध्यान दिया जाता है। राजीव कुमार की टिप्पणी इसी मुद्दे को सामने लाती है कि सिर्फ बड़े प्रोजेक्ट ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की परिचालन व्यवस्था में भी सुधार जरूरी है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?
राजीव कुमार की पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भी रेलवे के अनाउंसमेंट सिस्टम को लेकर अपने अनुभव साझा किए। कई यूजर्स ने कहा कि कई स्टेशनों पर जरूरत से ज्यादा शोर होता है, लगातार घोषणाओं से यात्रियों को परेशानी होती है, ट्रेन के दरवाजे समय पर नहीं खुलते, डिजिटल सूचना बोर्ड होने के बावजूद बार-बार ऑडियो अनाउंसमेंट किए जाते हैं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि रेलवे को AI आधारित स्मार्ट अनाउंसमेंट सिस्टम अपनाना चाहिए, जिससे सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही घोषणाएं हों।
पीएम मोदी की ऊर्जा बचत अपील क्यों चर्चा में है?
हाल के समय में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से ऊर्जा बचाने की अपील की थी। बढ़ती बिजली मांग, गर्मी और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच सरकार लगातार बिजली बचत पर जोर दे रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि:
- सार्वजनिक स्थानों पर बिजली की बर्बादी कम करना जरूरी है
- सरकारी संस्थानों को उदाहरण पेश करना चाहिए
- रेलवे, एयरपोर्ट और सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन लागू होना चाहिए
ऐसे में राजीव कुमार की टिप्पणी को सिर्फ रेलवे शिकायत नहीं, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर एक बड़ी बहस के रूप में देखा जा रहा है।
क्या बदल सकता है रेलवे का सिस्टम?
रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में भारतीय रेलवे निम्न बदलावों पर काम कर सकता है:
स्मार्ट अनाउंसमेंट टेक्नोलॉजी
AI आधारित सिस्टम जो जरूरत के हिसाब से घोषणाएं करे।
ऑटोमैटिक डोर कोऑर्डिनेशन
ट्रेन प्लेटफॉर्म पर लगते ही यात्रियों के लिए समय पर दरवाजे खुलें।
Noise Management Policy
स्टेशन पर ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए नई गाइडलाइन।
डिजिटल सूचना का विस्तार
मोबाइल ऐप, स्क्रीन और SMS आधारित सूचना प्रणाली को मजबूत करना।
यात्रियों के अनुभव पर क्यों बढ़ रहा फोकस?
भारतीय रेलवे अब सिर्फ परिवहन सेवा नहीं, बल्कि “यात्री अनुभव” पर भी ध्यान देने की बात कर रहा है। वंदे भारत, स्टेशन री-डेवलपमेंट और स्मार्ट टिकटिंग जैसे कदम इसी दिशा में माने जाते हैं। लेकिन यात्रियों का वास्तविक अनुभव कई बार छोटी व्यवस्थागत समस्याओं से प्रभावित हो जाता है।
राजीव कुमार का मामला इसी बात की याद दिलाता है कि:
- टेक्नोलॉजी तभी सफल मानी जाएगी जब वह यात्रियों की सुविधा बढ़ाए
- अनावश्यक प्रक्रियाएं कम हों
- संसाधनों का समझदारी से उपयोग हो
निष्कर्ष
काठगोदाम स्टेशन पर हुई यह घटना भले छोटी लगे, लेकिन इसने भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली, ऊर्जा बचत और सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर एक बड़ी चर्चा छेड़ दी है। पूर्व नीति आयोग उपाध्यक्ष राजीव कुमार की टिप्पणी ने यह सवाल उठाया है कि क्या सरकारी संस्थानों में अभी भी कई प्रक्रियाएं जरूरत से ज्यादा संसाधन खर्च कर रही हैं?
ऊर्जा संकट और बढ़ती बिजली मांग के दौर में अब केवल बड़े प्रोजेक्ट ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी व्यवस्थाओं को भी अधिक स्मार्ट और कुशल बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
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