गढ़मुक्तेश्वर में 300 हेक्टेयर जमीन पर शुरू हुई तैयारी, भविष्य में 1000 हेक्टेयर तक हो सकता है विस्तार
उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में तीसरे औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridor) के निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। शासन स्तर पर 300 हेक्टेयर भूमि की मांग के बाद प्रशासन ने प्रारंभिक सर्वे का काम पूरा कर लिया है। अब जमीन पर मौजूद नलकूप, मकान और अन्य निर्माणों का मूल्यांकन किया जा रहा है।
इस परियोजना को गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास बनने वाले सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक विस्तारों में से एक माना जा रहा है। इससे न केवल हापुड़ बल्कि मेरठ, बुलंदशहर और अमरोहा जैसे जिलों के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश भी तेजी पकड़ सकता है।
रजापुर गांव के पास विकसित होगा नया औद्योगिक क्षेत्र
जानकारी के अनुसार गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के रजापुर गांव के आसपास इस तीसरे औद्योगिक गलियारे को विकसित करने की योजना बनाई गई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने जमीन का प्रारंभिक सर्वे पूरा कर लिया है और अब भूमि अधिग्रहण की अगली प्रक्रिया पर काम चल रहा है।
इससे पहले भी गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास दो औद्योगिक गलियारे प्रस्तावित किए जा चुके हैं। इनमें बहादुरगढ़ क्षेत्र के सदरपुर, भैना, चुचावली और ठेरा गांवों में करीब 108 हेक्टेयर भूमि, जखैड़ा रहमतपुर क्षेत्र में लगभग 107 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक विकास की योजना तैयार की गई थी। इन दोनों परियोजनाओं के लिए करीब 70 हेक्टेयर जमीन के बैनामे भी पूरे हो चुके हैं।
अब रजापुर क्षेत्र को जोड़ने के बाद यह औद्योगिक क्लस्टर काफी बड़े आकार में विकसित हो सकता है।
एक हजार हेक्टेयर तक विस्तार की संभावना
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक यह परियोजना सिर्फ 300 हेक्टेयर तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में इसका विस्तार करीब 1000 हेक्टेयर तक किया जा सकता है। अगले चरण में चांदनेर, आलमनगर, पूठ और शंकराटीला जैसे क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
अगर ऐसा होता है तो यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक विकास क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। एक्सप्रेसवे के किनारे उद्योग स्थापित होने से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और कंपनियों को दिल्ली-एनसीआर, नोएडा और मेरठ जैसे बड़े बाजारों तक तेज कनेक्टिविटी मिलेगी।
युवाओं को स्थानीय स्तर पर मिलेगा रोजगार
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय युवाओं को मिलने वाला है। वर्तमान में हापुड़, अमरोहा, बुलंदशहर और आसपास के जिलों के हजारों युवा नौकरी की तलाश में नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली और गुरुग्राम का रुख करते हैं।
स्थानीय स्तर पर उद्योग लगने से:
- फैक्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नौकरियां बढ़ेंगी
- ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को फायदा होगा
- वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन से जुड़े रोजगार पैदा होंगे
- छोटे व्यापारियों और दुकानदारों की आय बढ़ सकती है
- होटल, रेस्टोरेंट और रियल एस्टेट सेक्टर में भी तेजी आने की संभावना है
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे आधारित औद्योगिक विकास आने वाले वर्षों में पश्चिमी यूपी की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
गंगा एक्सप्रेसवे से बढ़ेगी निवेश की संभावनाएं
गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में गिना जाता है। यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के कई जिलों को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करेगा। एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक गलियारों के विकास से सरकार का लक्ष्य नए निवेश आकर्षित करना और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े एक्सप्रेसवे के आसपास इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित होने से जमीन की कीमतों में तेजी आती है, निजी निवेश बढ़ता है, MSME सेक्टर को मजबूती मिलती है, निर्यात आधारित उद्योगों को फायदा होता है, क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बनने वाले ये औद्योगिक क्षेत्र भविष्य में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए नए आर्थिक हब के रूप में उभर सकते हैं।
जमीन का मूल्यांकन शुरू
गढ़मुक्तेश्वर के एसडीएम श्रीराम यादव ने बताया कि शासन द्वारा 300 हेक्टेयर जमीन की मांग की गई है और रजापुर क्षेत्र में सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। अब जमीन पर मौजूद मकानों, नलकूपों और अन्य निर्माणों का आकलन किया जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि आगे की प्रक्रिया शासन के निर्देशों के अनुसार पूरी की जाएगी। साथ ही भविष्य में औद्योगिक गलियारे के बड़े विस्तार की संभावना भी बनी हुई है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
औद्योगिक गलियारा बनने से सिर्फ रोजगार ही नहीं बढ़ेगा बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। ट्रांसपोर्ट, निर्माण, होटल, गोदाम, पेट्रोल पंप और स्थानीय बाजारों को भी इसका फायदा मिल सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो हापुड़ और गढ़मुक्तेश्वर आने वाले वर्षों में पश्चिमी यूपी के महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र बन सकते हैं।
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