नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। रुपये में कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और एशियाई बाजारों में भारी गिरावट के बावजूद भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी भी 23,750 के ऊपर पहुंच गया। बाजार की इस तेजी ने निवेशकों को राहत दी है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक संकेत कमजोर बने हुए हैं।
सुबह करीब 10 बजे बीएसई सेंसेक्स 348.65 अंक यानी 0.46 फीसदी की तेजी के साथ 75,747.37 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 102.70 अंक यानी 0.43 फीसदी चढ़कर 23,792.30 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को भी बाजार में मजबूत खरीदारी देखने को मिली थी।
कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय बाजार क्यों चढ़ा?
आमतौर पर जब डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तब भारतीय शेयर बाजार पर दबाव देखने को मिलता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है और इसका असर कंपनियों की लागत तथा महंगाई दोनों पर पड़ता है।
इसके बावजूद भारतीय बाजार में तेजी यह संकेत देती है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की सीमित खरीदारी, आईटी शेयरों में मजबूती और हालिया गिरावट के बाद वैल्यू बाइंग ने बाजार को सहारा दिया।
आईटी शेयरों ने संभाला बाजार
आज के कारोबार में आईटी सेक्टर सबसे मजबूत दिखाई दिया। सेंसेक्स में शामिल कई दिग्गज टेक कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई।
सबसे ज्यादा तेजी वाले शेयरों में शामिल रहे:
- इन्फोसिस
- टीसीएस
- एचसीएल टेक
- टेक महिंद्रा
- पावर ग्रिड
- अडानी पोर्ट्स
- मारुति सुजुकी
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आईटी कंपनियों के लिए सकारात्मक मानी जाती है क्योंकि इन कंपनियों की बड़ी कमाई विदेशी बाजारों से होती है। कमजोर रुपया उनके निर्यात राजस्व को बढ़ाने में मदद करता है।
इन शेयरों में रही गिरावट
जहां आईटी और कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में तेजी रही, वहीं बैंकिंग और कुछ एफएमसीजी शेयरों पर दबाव दिखाई दिया।
गिरावट वाले प्रमुख शेयर: एसबीआई, एशियन पेंट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज इन शेयरों में करीब 2 फीसदी तक कमजोरी दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक ऊंचे कच्चे तेल के दाम और लागत बढ़ने की आशंका से कुछ सेक्टरों में मुनाफावसूली देखने को मिली।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी
बाजार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी हल्की बढ़त देखने को मिली। हालांकि बाजार की चौड़ाई बहुत मजबूत नहीं रही क्योंकि एनएसई पर गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से ज्यादा रही।
एनएसई के आंकड़ों के मुताबिक: 1,050 शेयरों में तेजी रही, 1,276 शेयरों में गिरावट आई, 116 शेयर बिना बदलाव के कारोबार करते दिखे यह संकेत देता है कि बाजार में चुनिंदा सेक्टरों और शेयरों में ही खरीदारी केंद्रित रही।
विदेशी निवेशकों की वापसी से मिला सहारा
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) गुरुवार को नेट खरीदार रहे। उन्होंने करीब 187 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इससे पहले लगातार सात कारोबारी सत्रों तक विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे थे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो आने वाले दिनों में बाजार को और मजबूती मिल सकती है। हालांकि वैश्विक परिस्थितियों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
रुपया फिर टूटा, डॉलर के मुकाबले पहुंचा 95.93 पर
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 29 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले 95.93 पर पहुंच गया। रुपये में यह कमजोरी बढ़ते कच्चे तेल के दाम और डॉलर इंडेक्स में मजबूती के कारण देखी जा रही है।
कमजोर रुपया:
- आयात लागत बढ़ाता है
- महंगाई पर दबाव डालता है
- तेल मार्केटिंग कंपनियों की चिंता बढ़ाता है
हालांकि आईटी और फार्मा जैसी निर्यात आधारित कंपनियों को इसका फायदा मिल सकता है।
कच्चे तेल में तेजी क्यों चिंता की बात है?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.22 फीसदी बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। पश्चिम एशिया में तनाव, सप्लाई को लेकर चिंता और वैश्विक मांग में सुधार की उम्मीदों के चलते तेल कीमतों में तेजी बनी हुई है।
अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर बनी रहती है तो इसका असर भारत के: चालू खाते के घाटे, महंगाई, पेट्रोल-डीजल कीमतों और सरकारी वित्तीय संतुलन पर पड़ सकता है।
एशियाई बाजारों में भारी गिरावट
भारतीय बाजार की तेजी के उलट एशियाई बाजारों में भारी दबाव देखने को मिला।
प्रमुख एशियाई बाजारों का हाल:
- साउथ कोरिया का कॉस्पी 3% से ज्यादा टूटा
- जापान का निक्केई 1% से ज्यादा गिरा
- हॉन्ग कॉन्ग का हैंग सेंग भी कमजोर रहा
- चीन का शंघाई कंपोजिट मामूली बढ़त में कारोबार करता दिखा
वैश्विक निवेशकों की चिंता का बड़ा कारण बढ़ती बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव बने हुए हैं।
अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों से मिला सपोर्ट
गुरुवार को अमेरिकी और यूरोपीय बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। अमेरिकी टेक शेयरों में खरीदारी और मजबूत आर्थिक आंकड़ों से वैश्विक सेंटीमेंट को कुछ समर्थन मिला। इसका असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी देखने को मिला।
आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई अहम फैक्टर्स पर निर्भर करेगी कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेत, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव अगर एफआईआई खरीदारी जारी रखते हैं और आईटी सेक्टर में मजबूती बनी रहती है तो बाजार में तेजी जारी रह सकती है। हालांकि ऊंचे तेल दाम और कमजोर रुपया बाजार के लिए जोखिम बने रहेंगे।
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