भारत के बड़े कारोबारी समूहों में शामिल Adani Enterprises एक बार फिर बाजार में चर्चा का केंद्र बन गया है। शुक्रवार को कंपनी में करीब ₹1,435 करोड़ का बड़ा ब्लॉक डील हुआ, जिसमें मशहूर निवेशक GQG Partners ने अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच दिया। इस डील में खरीदार देश की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी SBI Mutual Fund रही।
इस बड़े ट्रांजैक्शन के बीच Adani Enterprises के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली और स्टॉक NSE पर इंट्राडे में करीब 9 प्रतिशत तक उछल गया। पिछले दो कारोबारी सत्रों में शेयर 10 प्रतिशत से अधिक मजबूत हुआ है। बाजार विशेषज्ञ इस डील को केवल हिस्सेदारी बिक्री नहीं बल्कि संस्थागत निवेशकों के बीच भरोसे के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं।
क्या हुआ इस ब्लॉक डील में?
स्टॉक एक्सचेंज डेटा के अनुसार, GQG Partners Emerging Markets Equity Fund ने Adani Enterprises के करीब 58.92 लाख शेयर बेचे। यह सौदा ₹2,435.6 प्रति शेयर के भाव पर किया गया।
दिलचस्प बात यह रही कि पूरी हिस्सेदारी SBI Mutual Fund ने खरीद ली। इस हिसाब से डील का कुल मूल्य लगभग ₹1,435 करोड़ बैठता है।
बाजार में ब्लॉक डील अक्सर बड़े संस्थागत निवेशकों के पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग का हिस्सा मानी जाती है। हालांकि इतनी बड़ी डील के बावजूद शेयर में कमजोरी आने के बजाय तेजी देखी गई, जो निवेशकों के सकारात्मक नजरिए को दिखाती है।
क्यों अहम है GQG Partners?
GQG Partners पिछले दो वर्षों में Adani Group के सबसे बड़े विदेशी संस्थागत समर्थकों में से एक रहा है। खासतौर पर 2023 में हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद जब Adani Group के शेयरों में भारी गिरावट आई थी, तब GQG ने समूह की कंपनियों में निवेश बढ़ाकर बाजार को बड़ा संदेश दिया था।
मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग डेटा के मुताबिक GQG की Adani Enterprises में हिस्सेदारी 3.87 प्रतिशत से बढ़कर 3.9 प्रतिशत हुई थी। अब इस ब्लॉक डील के बाद इसमें थोड़ी कमी आएगी।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरी तरह “exit signal” नहीं माना जा सकता क्योंकि GQG ने हाल की तिमाहियों में समूह की अन्य कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।
किन Adani कंपनियों में बढ़ाई गई हिस्सेदारी?
मार्च तिमाही के दौरान GQG ने Adani Green Energy, Adani Energy Solutions जैसी कंपनियों में भी निवेश बढ़ाया था। इससे संकेत मिलता है कि फंड की लंबे समय के लिए Adani Group के इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और यूटिलिटी बिजनेस पर सकारात्मक राय बनी हुई है।
विदेशी निवेशकों का रुख अब भी सतर्क
जहां GQG ने कुछ कंपनियों में भरोसा दिखाया, वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का कुल रुख अभी भी थोड़ा सतर्क नजर आया।
मार्च तिमाही में Adani Enterprises में FII हिस्सेदारी 11.64% से घटकर 10.8% रही, Adani Green और Adani Energy Solutions में भी विदेशी हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई. इससे साफ है कि विदेशी निवेशकों का एक वर्ग अभी भी समूह के शेयरों में जोखिम को लेकर सतर्क बना हुआ है।
Adani Enterprises के Q4 नतीजे कैसे रहे?
ब्लॉक डील ऐसे समय पर हुई है जब कंपनी ने हाल ही में मार्च तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी को चौथी तिमाही में ₹221 करोड़ का नेट लॉस हुआ, पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को ₹3,845 करोड़ का मुनाफा हुआ था हालांकि दूसरी ओर कंपनी की ऑपरेशनल आय मजबूत रही।
Revenue में मजबूत बढ़ोतरी
कंपनी का रेवेन्यू: 20% बढ़कर ₹32,439 करोड़ पहुंच गया
EBITDA भी बढ़ा
EBITDA: 3% बढ़कर ₹4,479 करोड़ रहा
कंपनी के मुताबिक मुनाफे पर असर मुख्य रूप से Navi Mumbai Airport प्रोजेक्ट, Copper Manufacturing Plant से जुड़े depreciation charges की वजह से पड़ा।
Infrastructure बिजनेस बना सबसे बड़ा सहारा
Adani Enterprises ने कहा कि अब उसके कुल EBITDA का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा infrastructure और utility businesses से आ रहा है।
यह कंपनी के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है क्योंकि इससे earnings visibility बेहतर होती है, cash flow stability बढ़ती है, cyclical business risk कम होता है
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में एयरपोर्ट, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस कंपनी की ग्रोथ को आगे बढ़ा सकते हैं।
पूरे FY26 में कैसा रहा प्रदर्शन?
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत मजबूत रहा।
FY26 Highlights
| Metric | आंकड़े |
|---|---|
| Total Income | ₹1.02 लाख करोड़ |
| Annual PAT | ₹9,339 करोड़ |
| Profit Growth | 31% |
कंपनी ने बताया कि सालाना मुनाफे में बढ़ोतरी exceptional gains की वजह से हुई।
शेयर बाजार क्या संकेत दे रहा है?
ब्लॉक डील के बाद भी शेयर में तेजी बने रहना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि बाजार:
- इस बिक्री को negative नहीं मान रहा
- SBI Mutual Fund की खरीद को strong confidence signal मान रहा
- Adani Group के infrastructure assets पर long-term bet जारी है
हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि Adani शेयरों में volatility अभी भी बनी रह सकती है क्योंकि valuation ऊंचे स्तर पर हैं, global interest rates, foreign flows, regulatory developments आगे भी स्टॉक की दिशा तय करेंगे।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
यह डील कई महत्वपूर्ण संकेत देती है:
- बड़े घरेलू संस्थागत निवेशक अब Adani कंपनियों में अधिक सक्रिय हो रहे हैं।
- GQG पूरी तरह बाहर नहीं निकला है, बल्कि portfolio balancing करता दिख रहा है।
- Infrastructure और utility focused मॉडल की वजह से कंपनी की long-term earnings visibility मजबूत हो रही है।
- Q4 loss के बावजूद बाजार operational growth पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
आने वाले समय में निवेशकों की नजर Navi Mumbai Airport, Copper business, Green hydrogen, Renewable energy expansion जैसे प्रोजेक्ट्स पर बनी रहेगी।
Also Read:


