दिल्ली में रेल यात्रियों के लिए बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। अब Namo Bharat और रेलवे के बीच कनेक्टिविटी पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गई है। Hazrat Nizamuddin Railway Station को Sarai Kale Khan Namo Bharat Station से जोड़ने वाला नया हाई-टेक फुटओवर ब्रिज (FOB) यात्रियों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है।
इस आधुनिक ब्रिज के शुरू होने से अब यात्रियों को स्टेशन बदलने के लिए सड़क पार करने, ट्रैफिक झेलने या लंबा पैदल रास्ता तय करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रेलवे स्टेशन से नमो भारत स्टेशन तक अब सिर्फ 4 से 5 मिनट में आसानी से पहुंचा जा सकेगा। दिल्ली-एनसीआर में रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों के लिए यह सुविधा गेमचेंजर मानी जा रही है।
रेलवे और RRTS कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा फायदा
दिल्ली-एनसीआर में तेजी से विकसित हो रहे रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) नेटवर्क को भारतीय रेलवे से जोड़ना लंबे समय से एक बड़ी जरूरत माना जा रहा था। खासतौर पर हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त स्टेशन पर हर दिन हजारों यात्री उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की ओर जाने वाली ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं।
अब नया फुटओवर ब्रिज शुरू होने के बाद ट्रेन से उतरने वाले यात्री सीधे नमो भारत स्टेशन तक पहुंच सकेंगे। इससे इंटरचेंज टाइम कम होगा और यात्रियों का सफर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा।
300 मीटर लंबा हाई-टेक फुटओवर ब्रिज
यह नया फुटओवर ब्रिज आधुनिक तकनीक और यात्री सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसकी कुल लंबाई करीब 300 मीटर है। पूरे ब्रिज को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्रियों को कम से कम समय में एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुंचाया जा सके।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, सामान्य पैदल गति से भी यात्री लगभग 4 से 5 मिनट में पूरा रास्ता तय कर सकते हैं। खास बात यह है कि सराय काले खां रिंग रोड की ओर से आने-जाने वाले लोग भी इस ब्रिज का इस्तेमाल करके सीधे हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पहुंच सकेंगे।
बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए खास सुविधाएं
इस नए पैदल मार्ग में सिर्फ कनेक्टिविटी पर ही नहीं बल्कि यात्रियों की सुविधा और आराम पर भी खास ध्यान दिया गया है। स्टेशन परिसर में बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई हैं।
स्टेशन पर मिलेंगी ये सुविधाएं
- लिफ्ट की सुविधा
- एस्केलेटर की व्यवस्था
- 65 मीटर लंबे मूविंग वॉकवे
- हर दिशा में 3 ट्रेवललेटर
- स्पष्ट दिशा संकेतक बोर्ड
- बेहतर एलईडी लाइटिंग सिस्टम
रेलवे और RRTS अधिकारियों का कहना है कि मूविंग वॉकवे लगने से यात्रियों की थकान काफी कम होगी, खासकर उन लोगों को राहत मिलेगी जो भारी सामान लेकर सफर करते हैं।
सुरक्षा के लिए लगाए गए CCTV कैमरे
यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए पूरे फुटओवर ब्रिज और पैदल मार्ग को 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी में रखा गया है। स्टेशन परिसर में हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से की जाएगी।
इसके अलावा रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए टिकटिंग सिस्टम को भी मजबूत किया है। हजरत निजामुद्दीन स्टेशन की ओर 5 UTS टिकट काउंटर और एक पूछताछ केंद्र बनाया गया है। वहीं डिजिटल टिकटिंग को बढ़ावा देने के लिए 8 ATVM मशीनें भी लगाई गई हैं।
डिजिटल टिकटिंग को मिलेगा बढ़ावा
रेलवे अब यात्रियों को डिजिटल टिकटिंग की ओर तेजी से शिफ्ट करना चाहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्टेशन परिसर में QR कोड आधारित टिकटिंग सुविधा भी दी गई है। यात्री ‘रेल वन सुपर ऐप’ के जरिए मोबाइल से टिकट बुक कर सकेंगे।
इससे लंबी कतारों में लगने की जरूरत कम होगी और स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन आसान होगा। आने वाले समय में दिल्ली के अन्य बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी इसी तरह की सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।
दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया इंटरचेंज दिल्ली की मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट प्रणाली को मजबूत करेगा। इससे:
- रेलवे और RRTS के बीच seamless connectivity मिलेगी
- यात्रा समय कम होगा
- सड़क ट्रैफिक पर दबाव घटेगा
- सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ेगा
- NCR के दैनिक यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के विस्तार के साथ ऐसे इंटरचेंज भविष्य में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का नया मॉडल
राजधानी दिल्ली में मेट्रो, रेलवे और अब नमो भारत जैसे हाई-स्पीड ट्रांजिट नेटवर्क को जोड़ने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में यात्रियों को “वन सिटी, वन कनेक्टेड ट्रांजिट नेटवर्क” जैसा अनुभव देने की तैयारी की जा रही है।
नया फुटओवर ब्रिज सिर्फ एक पैदल मार्ग नहीं बल्कि राजधानी के भविष्य के स्मार्ट ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की झलक भी माना जा रहा है।
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