PM Modi Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सादगी और ईंधन बचत की अपील का असर अब देश के बड़े उद्योग समूहों में भी दिखने लगा है। RPG ग्रुप के चेयरमैन Harsh Goenka ने अपनी कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम बढ़ाने, विदेशी और घरेलू यात्राओं में कटौती करने, वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता देने और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने का निर्देश दिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश ऊर्जा लागत, वैश्विक तेल संकट और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग जैसे मुद्दों से जूझ रहा है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों और उद्योग जगत से जिम्मेदारीपूर्ण खर्च और संसाधनों के बेहतर उपयोग की अपील की थी। उन्होंने आम लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने और उद्योग जगत से ईंधन बचत के लिए वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की बात कही थी। अब इस अपील का असर बड़े कॉरपोरेट समूहों में दिखाई देने लगा है।
इसी कड़ी में RPG समूह के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने अपनी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक विस्तृत नोट जारी किया है। इस नोट में लागत नियंत्रण, यात्रा में कटौती, रिमोट वर्किंग और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।
हर्ष गोयनका ने क्या कहा?
हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि समूह की सभी कंपनियों को प्रधानमंत्री की अपील को गंभीरता से लेते हुए उदाहरण पेश करना चाहिए। उन्होंने लिखा कि मौजूदा परिस्थितियों में कॉरपोरेट सेक्टर की जिम्मेदारी केवल मुनाफा कमाने तक सीमित नहीं है, बल्कि संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना भी जरूरी है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि समूह की कंपनियां विवेकाधीन खर्च (Discretionary Spending) कम करें और उन सभी गतिविधियों की समीक्षा करें जिनसे अनावश्यक ईंधन खपत या अतिरिक्त लागत बढ़ती है।
गोयनका ने लिखा कि, “एक समूह के रूप में यह महत्वपूर्ण है कि हम इन उपायों को पूरे दिल से अपनाकर नेतृत्व दिखाएं और अपनी टीमों के लिए सही उदाहरण स्थापित करें।”
वर्क फ्रॉम होम को मिलेगा बढ़ावा
We in RPG have responded to our PM’s call with austerity and responsible resource allocations. I hope other corporates will follow suit. pic.twitter.com/Bhv0RVUFjq
— Harsh Goenka (@hvgoenka) May 14, 2026 RPG समूह ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिन कर्मचारियों का काम घर से संभव है, उन्हें सक्रिय रूप से Work From Home के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इसका मकसद केवल लागत कम करना नहीं बल्कि ईंधन बचत और ट्रैफिक दबाव को भी कम करना है।
पिछले कुछ वर्षों में महामारी के बाद भारत में हाइब्रिड और रिमोट वर्क मॉडल तेजी से लोकप्रिय हुआ है। हालांकि कई कंपनियों ने बाद में कर्मचारियों को ऑफिस बुलाना शुरू कर दिया था, लेकिन अब ऊर्जा बचत और लागत नियंत्रण के कारण फिर से Work From Home पर जोर बढ़ता दिख रहा है।
कॉरपोरेट विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनियों के ऑफिस ऑपरेशन खर्च, बिजली बिल और ट्रैवल कॉस्ट में भी कमी आ सकती है। साथ ही कर्मचारियों को आने-जाने में लगने वाले समय और ईंधन की भी बचत होगी।
विदेशी और घरेलू यात्रा पर सख्ती
हर्ष गोयनका के नोट में कंपनी अधिकारियों की यात्राओं को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। समूह ने कहा है कि:
- विदेशी यात्राओं को न्यूनतम रखा जाए
- घरेलू हवाई यात्रा में बड़ी कटौती की जाए
- इंटर-सिटी मीटिंग्स से बचा जाए
- अधिकतर बैठकों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया जाए
कॉरपोरेट जगत में बीते कुछ वर्षों में Zoom, Google Meet और Microsoft Teams जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग काफी बढ़ा है। महामारी के दौरान शुरू हुई यह प्रवृत्ति अब लागत नियंत्रण और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के कारण फिर से मजबूत होती दिख रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े कॉरपोरेट समूह यदि यात्रा में 20-30% भी कटौती करते हैं तो इससे सालाना करोड़ों रुपये की बचत संभव है।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों पर जोर
RPG समूह ने अपने विभिन्न बिजनेस वर्टिकल्स को कंपनी कारों और साइट-लीज वाहनों में इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड व्हीकल्स को प्राथमिकता देने को कहा है।
गोयनका ने निर्देश दिया है कि जहां कहीं भी इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव लंबित है, उसे तेजी से लागू किया जाए। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत सरकार भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा दे रही है।
देश में पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों के बीच कई कंपनियां अब EV आधारित कॉर्पोरेट फ्लीट की ओर बढ़ रही हैं। इससे न केवल ईंधन लागत कम होती है बल्कि कार्बन उत्सर्जन भी घटता है।
कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा
RPG समूह ने कर्मचारियों से कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग की भी अपील की है। कंपनी का कहना है कि इससे ट्रैफिक दबाव और ईंधन खपत दोनों कम हो सकते हैं।
भारत के बड़े शहरों में रोजाना लाखों लीटर ईंधन केवल ऑफिस आवागमन में खर्च होता है। ऐसे में यदि बड़ी कंपनियां हाइब्रिड वर्क मॉडल अपनाती हैं तो इसका सीधा असर ईंधन खपत पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर मेट्रो शहरों में केवल 10% कॉरपोरेट कर्मचारी भी सप्ताह में 2 दिन Work From Home अपनाते हैं तो इससे हर साल करोड़ों लीटर ईंधन की बचत हो सकती है।
अनुपम मित्तल ने भी की नई घोषणा
Kabhi socha nahin, but 1 day remote for 500 employees means 30 k liters of petrol saved a year. Wed r now WFH 🇮🇳
— Anupam Mittal (@AnupamMittal) May 13, 2026 Anupam Mittal ने भी प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद अपनी कंपनी में नई Work From Home नीति लागू करने की घोषणा की है।
Shaadi.com के संस्थापक अनुपम मित्तल ने X पर बताया कि उनकी कंपनी अब कर्मचारियों को हर सप्ताह एक दिन रिमोट तरीके से काम करने की अनुमति देगी।
उन्होंने लिखा, “कभी सोचा नहीं, लेकिन 500 कर्मचारियों के लिए एक दिन रिमोट का मतलब सालाना 30 हजार लीटर पेट्रोल की बचत है। अब हम WFH हैं।”
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और कई यूजर्स इसे जिम्मेदार कॉरपोरेट सोच का उदाहरण बता रहे हैं।
क्यों अहम है यह फैसला?
RPG समूह और अन्य कंपनियों के ये फैसले ऐसे समय में आए हैं जब दुनिया ऊर्जा संकट, बढ़ती ईंधन कीमतों और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में ईंधन खपत कम करने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की दिशा में सरकार और कॉरपोरेट सेक्टर दोनों के प्रयास महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में:
- Hybrid Work Model बढ़ सकता है
- Virtual Meetings सामान्य बन सकती हैं
- कंपनियां EV Fleet की ओर तेजी से बढ़ सकती हैं
- Corporate Travel Budget में कटौती हो सकती है
कॉरपोरेट संस्कृति में बड़ा बदलाव?
कोविड महामारी के बाद पहली बार ऐसा दिख रहा है कि Work From Home केवल कर्मचारी सुविधा का मुद्दा नहीं रह गया है। अब इसे लागत नियंत्रण, ऊर्जा बचत, पर्यावरण संरक्षण, और जिम्मेदार कॉरपोरेट गवर्नेंस से जोड़कर देखा जा रहा है।
अगर बड़े उद्योग समूह इसी तरह के कदम उठाते हैं तो आने वाले वर्षों में भारत की कॉरपोरेट कार्यसंस्कृति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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