अमेरिका की दिग्गज AI चिप कंपनी NVIDIA ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती वैश्विक मांग और अमेरिकी बाजार में जबरदस्त तेजी के बीच कंपनी का मार्केट कैप 5.5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। इसके साथ ही एनवीडिया दुनिया की दूसरी सबसे वैल्यूएबल एसेट बन गई है। अब मार्केट वैल्यू के मामले में उससे आगे केवल सोना है।
बुधवार को कंपनी के शेयरों में 2 फीसदी से अधिक उछाल आया, जिसने एनवीडिया को इतिहास रचने में मदद की। कंपनी अब चांदी को पीछे छोड़ चुकी है और ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में उसकी स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है।
AI बूम ने बदल दी एनवीडिया की किस्मत
कुछ साल पहले तक एनवीडिया को मुख्य रूप से गेमिंग ग्राफिक्स कार्ड बनाने वाली कंपनी माना जाता था। लेकिन AI क्रांति ने इस कंपनी को टेक्नोलॉजी जगत का सबसे बड़ा सितारा बना दिया। ChatGPT जैसे AI मॉडल, डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स के लिए हाई-परफॉर्मेंस चिप्स की भारी मांग ने कंपनी को अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
आज दुनिया की लगभग हर बड़ी टेक कंपनी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, मेटा, गूगल और टेस्ला जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन सभी को AI ट्रेनिंग और डेटा प्रोसेसिंग के लिए एनवीडिया के GPU चिप्स की जरूरत पड़ रही है।
यही वजह है कि निवेशकों का भरोसा लगातार कंपनी पर बढ़ता जा रहा है।
अब केवल सोना ही आगे
मार्केट कैप के मामले में एनवीडिया अब केवल सोने से पीछे है। वैश्विक स्तर पर सोने की कुल अनुमानित वैल्यू करीब 32.675 ट्रिलियन डॉलर मानी जाती है। इसके मुकाबले एनवीडिया ने 5.5 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि कुछ साल पहले तक दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में तेल, बैंकिंग और ई-कॉमर्स कंपनियों का दबदबा हुआ करता था। अब AI सेक्टर तेजी से पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र बनता दिख रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर AI निवेश की यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले वर्षों में एनवीडिया और अन्य AI कंपनियां पारंपरिक इंडस्ट्रीज को पीछे छोड़ सकती हैं।
ट्रंप के चीन दौरे ने बढ़ाया उत्साह
एनवीडिया के शेयरों में तेजी के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का चीन दौरा भी माना जा रहा है। कंपनी के फाउंडर और CEO Jensen Huang खुद ट्रंप के साथ चीन गए हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि “एनवीडिया के महान जेंसन हुआंग मेरे साथ एयर फोर्स वन में बैठे हैं और हम चीन जा रहे हैं।”
इस बयान के बाद बाजार में यह संकेत गया कि अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी तथा सेमीकंडक्टर तनाव में कुछ नरमी आ सकती है। निवेशकों ने इसे AI और चिप सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माना।
सेमीकंडक्टर वॉर के बीच बड़ा संकेत
पिछले दो वर्षों से अमेरिका और चीन के बीच सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी को लेकर जबरदस्त तनातनी चल रही है। अमेरिका ने चीन को एडवांस AI चिप्स की सप्लाई पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इससे एनवीडिया समेत कई अमेरिकी कंपनियों को झटका लगा था क्योंकि चीन उनके लिए बड़ा बाजार है।
हालांकि अब ट्रंप के चीन दौरे को संभावित बातचीत और व्यापारिक नरमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि टेक शेयरों में खरीदारी बढ़ गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका-चीन संबंधों में सुधार होता है तो एनवीडिया को सबसे बड़ा फायदा मिल सकता है।
अमेरिकी बाजार में रिकॉर्ड तेजी
ट्रंप के चीन दौरे से पहले अमेरिकी शेयर बाजार में भी शानदार तेजी देखने को मिली। अमेरिका का प्रमुख इंडेक्स S&P 500 मार्च के निचले स्तर से करीब 18 फीसदी उछल चुका है।
सिर्फ छह हफ्तों में अमेरिकी शेयर बाजार में करीब 10.2 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यू जुड़ी है। टेक कंपनियों में सबसे ज्यादा तेजी AI सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में देखने को मिल रही है।
Alphabet भी तेजी से 5 ट्रिलियन डॉलर मार्केट कैप के करीब पहुंच रही है। कंपनी की वैल्यू 4.834 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है।
AI सेक्टर में निवेशकों का भरोसा क्यों बढ़ रहा?
AI अब केवल टेक्नोलॉजी ट्रेंड नहीं रह गया है। यह पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को बदलने वाला सेक्टर बन चुका है। बैंकिंग, हेल्थकेयर, ऑटोमोबाइल, डिफेंस, एजुकेशन और मीडिया — हर सेक्टर में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
एनवीडिया इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरी है क्योंकि AI मॉडल्स को चलाने के लिए उसके हाई-एंड GPU चिप्स की सबसे ज्यादा मांग है।
कई विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले पांच सालों में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खरबों डॉलर का निवेश हो सकता है। इससे एनवीडिया की ग्रोथ और तेज हो सकती है।
क्या AI बबल बन रहा है?
हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स चेतावनी भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि AI कंपनियों के शेयरों में तेजी बहुत तेज रही है और इसमें ओवरवैल्यूएशन का खतरा भी मौजूद है।
लेकिन दूसरी तरफ AI समर्थक विश्लेषकों का तर्क है कि यह इंटरनेट क्रांति जैसी ऐतिहासिक टेक्नोलॉजी शिफ्ट है और अभी इसकी शुरुआत भर हुई है।
यानी आने वाले समय में AI सेक्टर दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन सकता है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
एनवीडिया की तेजी का असर भारत पर भी दिख सकता है। भारत तेजी से AI, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश बढ़ा रहा है। सरकार भी AI मिशन और चिप मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है।
अगर AI सेक्टर की यही रफ्तार जारी रहती है तो भारतीय IT कंपनियों, क्लाउड कंपनियों और डेटा सेंटर बिजनेस को भी बड़ा फायदा मिल सकता है।
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