भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को एक बार फिर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया। कारोबार शुरू होते ही बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी50 24,200 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया। सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और ऑटो शेयरों पर दिखाई दिया, जबकि आईटी और फार्मा सेक्टर ने बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की।
सुबह करीब 9:45 बजे सेंसेक्स 565 अंक टूटकर 77,279 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी50 178 अंक गिरकर 24,148 तक पहुंच गया। रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली और यह डॉलर के मुकाबले 94.58 पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 94.25 पर बंद हुआ था। विदेशी निवेशकों की सतर्कता और क्रूड ऑयल में तेजी ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया।
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात रहे। अमेरिका ने ईरान के कुछ ठिकानों पर कार्रवाई की पुष्टि की, जिसके बाद वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई। अमेरिकी सेना का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे जहाजों पर हमलों के बाद यह जवाबी कार्रवाई की गई। इस घटनाक्रम ने निवेशकों के बीच यह डर बढ़ा दिया कि अगर तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में वहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर असर डालता है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1.11 फीसदी की तेजी के साथ 101 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय बन जाती हैं क्योंकि इससे महंगाई, व्यापार घाटा और सरकारी वित्तीय संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है।
शेयर बाजार में सबसे ज्यादा बिकवाली बैंकिंग शेयरों में देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे दिग्गज शेयर दबाव में रहे। निवेशकों को डर है कि अगर वैश्विक हालात बिगड़ते हैं और तेल महंगा होता है तो ब्याज दरों और आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि बैंकिंग सेक्टर में निवेशक फिलहाल जोखिम कम करना चाहते हैं।
ऑटो सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। महिंद्रा एंड महिंद्रा में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। ऑटो कंपनियों के लिए कच्चे तेल की कीमतें महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि इससे लॉजिस्टिक्स और उत्पादन लागत प्रभावित होती है। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज और कोल इंडिया जैसे बड़े शेयरों में भी गिरावट रही।
हालांकि पूरे बाजार में सिर्फ निराशा का माहौल नहीं था। आईटी और फार्मा शेयरों ने कुछ राहत जरूर दी। टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस और सन फार्मा जैसे शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखे। विशेषज्ञों का मानना है कि जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक डिफेंसिव सेक्टरों की ओर रुख करते हैं। आईटी कंपनियों को रुपये की कमजोरी का भी फायदा मिलता है क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा डॉलर में आता है।
ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में हल्की गिरावट रही जबकि स्मॉलकैप शेयरों में सीमित तेजी देखने को मिली। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशकों का फोकस फिलहाल बड़े और सुरक्षित शेयरों पर ज्यादा है। बाजार में वोलैटिलिटी बढ़ने के कारण ट्रेडर्स बेहद सतर्क नजर आए।
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा पूरी तरह पश्चिम एशिया की स्थिति, अमेरिकी नीतियों और कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी। अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज हो सकती है। वहीं, यदि कूटनीतिक समाधान निकलता है तो बाजार में मजबूत रिकवरी भी देखने को मिल सकती है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। भू-राजनीतिक संकट के दौर में बाजार में अचानक तेज उतार-चढ़ाव सामान्य बात होती है। ऐसे समय में मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना और लंबी अवधि की रणनीति बनाए रखना ज्यादा बेहतर माना जाता है।
भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन वैश्विक घटनाओं का असर भारतीय बाजार पर तेजी से पड़ता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल सिर्फ घरेलू संकेतों से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से भी तय होगी। फिलहाल निवेशकों की नजर कच्चे तेल, डॉलर इंडेक्स और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ी हर खबर पर बनी हुई है।
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