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बिजनेस न्यूज़

कंपनियों पर 7 लाख करोड़ का कर्ज और कम बारिश का खतरा! क्या 2026 में महंगी होगी आपकी बिजली?

Namam Sharma
Last updated: 2026/05/08 at 1:42 पूर्वाह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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7 Min Read
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भारत में बिजली की मांग को लेकर बड़ा संकेत सामने आया है। रेटिंग एजेंसी ICRA की नई रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में देश में बिजली की मांग 5% से 5.5% तक बढ़ सकती है। यह बढ़ोतरी सिर्फ सामान्य खपत की वजह से नहीं, बल्कि उद्योगों, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), डेटा सेंटर और बढ़ती गर्मी जैसे कई कारकों के कारण होने वाली है।

Contents
सिर्फ 1% से सीधे 5% से ज्यादा मांग वृद्धि का अनुमान‘एल नीनो’ और कम बारिश का खतरा क्यों बढ़ा रहा चिंता?थर्मल पावर और रिन्यूएबल एनर्जी दोनों पर फोकसडिस्कॉम्स पर 7.1 लाख करोड़ रुपये का भारी कर्जक्या बढ़ सकते हैं बिजली के दाम?कोयले का स्टॉक फिलहाल राहत दे रहाडेटा सेंटर और EV बन रहे नई चुनौतीआने वाले सालों में बिजली सेक्टर क्यों रहेगा सबसे अहम?

लेकिन इस अनुमान के साथ एक चिंता भी जुड़ी हुई है—देश की बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम्स पर अब भी करीब 7.1 लाख करोड़ रुपये का भारी कर्ज है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर बिजली की खरीद लागत बढ़ी और कंपनियों की आर्थिक हालत नहीं सुधरी, तो क्या आने वाले समय में आम लोगों के बिजली बिल महंगे हो सकते हैं?

सिर्फ 1% से सीधे 5% से ज्यादा मांग वृद्धि का अनुमान

पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में देश में बिजली की मांग में केवल 1% की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी। लेकिन अब इक्रा का अनुमान है कि अगले साल यह वृद्धि 5% से 5.5% तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:

  • औद्योगिक गतिविधियों में तेजी
  • कमर्शियल सेक्टर का विस्तार
  • इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का बढ़ता इस्तेमाल
  • बड़े डेटा सेंटर्स की बढ़ती संख्या
  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती जरूरत

भारत तेजी से डिजिटल और इलेक्ट्रिफाइड अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में बिजली की मांग का तेज़ी से बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

‘एल नीनो’ और कम बारिश का खतरा क्यों बढ़ा रहा चिंता?

रिपोर्ट में मौसम को लेकर भी बड़ी चेतावनी दी गई है। अगले वित्त वर्ष में ‘एल नीनो’ प्रभाव की आशंका जताई गई है, जिसके कारण सामान्य से कम बारिश हो सकती है।

अगर मानसून कमजोर रहता है, तो इसका सीधा असर बिजली की मांग पर पड़ेगा:

  • खेती के लिए ज्यादा पंप चलेंगे
  • गर्मी बढ़ने से AC और कूलर की खपत बढ़ेगी
  • ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बिजली उपयोग बढ़ेगा

यानी घरेलू और कृषि क्षेत्र दोनों से बिजली की अतिरिक्त मांग पैदा हो सकती है।

थर्मल पावर और रिन्यूएबल एनर्जी दोनों पर फोकस

भारत में फिलहाल तापीय बिजली संयंत्रों का PLF (Plant Load Factor) करीब 65-66% के आसपास है। इक्रा का अनुमान है कि बढ़ती मांग के बावजूद यह स्तर लगभग 65% के आसपास ही रहेगा।

इसकी एक बड़ी वजह रिन्यूएबल एनर्जी का तेजी से विस्तार है। देश में:

  • सोलर पावर
  • विंड एनर्जी
  • ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स

तेजी से बढ़ रहे हैं। साथ ही थर्मल सेक्टर में करीब 6 गीगावाट नई क्षमता भी जुड़ने वाली है।

इसका मतलब यह है कि सरकार फिलहाल बिजली सप्लाई को लेकर किसी बड़े संकट की स्थिति नहीं देख रही, लेकिन आर्थिक दबाव जरूर बना हुआ है।

डिस्कॉम्स पर 7.1 लाख करोड़ रुपये का भारी कर्ज

बिजली सेक्टर की सबसे बड़ी कमजोरी अब भी वितरण कंपनियां यानी डिस्कॉम्स मानी जा रही हैं।

मार्च 2024 में इन कंपनियों पर करीब 7.4 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जो मार्च 2025 तक घटकर 7.1 लाख करोड़ रुपये हुआ है। हालांकि यह गिरावट राहत जरूर देती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों की कमाई के मुकाबले यह कर्ज अब भी बहुत ज्यादा है।

यही वजह है कि बिजली वितरण क्षेत्र को लेकर इक्रा का आउटलुक अभी भी “नकारात्मक” बना हुआ है।

क्या बढ़ सकते हैं बिजली के दाम?

फिलहाल 28 में से 17 राज्यों ने नए वित्त वर्ष के लिए बिजली टैरिफ जारी कर दिए हैं। अभी तक ज्यादातर राज्यों ने सीमित बढ़ोतरी की है। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर:

  • बिजली खरीद लागत बढ़ती है
  • कोयला और ईंधन महंगा होता है
  • डिस्कॉम्स का घाटा बढ़ता है
  • और टैरिफ बढ़ोतरी सीमित रहती है

तो बिजली कंपनियों का प्रति यूनिट नकद घाटा 30-33 पैसे तक बना रह सकता है। ऐसी स्थिति में आने वाले महीनों में कुछ राज्यों में बिजली दरों में संशोधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

कोयले का स्टॉक फिलहाल राहत दे रहा

ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक राहत की बात यह है कि देश के बिजली संयंत्रों के पास फिलहाल लगभग 19 दिनों का कोयला स्टॉक मौजूद है। इसे आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।

लेकिन अगर गर्मी लंबी चली, बारिश कम हुई और मांग अचानक बहुत बढ़ गई, तो कोयला आपूर्ति और बिजली उत्पादन दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।

डेटा सेंटर और EV बन रहे नई चुनौती

भारत में AI, क्लाउड सर्विसेज और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के कारण बड़े डेटा सेंटर तेजी से बन रहे हैं। ये डेटा सेंटर चौबीसों घंटे भारी बिजली खपत करते हैं।

इसके अलावा EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तेजी से फैल रहा है। आने वाले वर्षों में यह बिजली मांग का एक बड़ा स्रोत बनने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि:

  • स्मार्ट ग्रिड
  • स्टोरेज टेक्नोलॉजी
  • ग्रीन एनर्जी
  • और वितरण सुधार

पर भी बड़े निवेश करने होंगे।

आने वाले सालों में बिजली सेक्टर क्यों रहेगा सबसे अहम?

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और डिजिटलाइजेशन की वजह से बिजली की मांग लगातार बढ़ती रहेगी।

लेकिन असली चुनौती होगी:

  • सस्ती बिजली उपलब्ध कराना
  • डिस्कॉम्स को घाटे से निकालना
  • ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन संभालना
  • और आम उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ न डालना

फिलहाल संकेत साफ हैं—देश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने वाली है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार और ऊर्जा कंपनियां इस बढ़ती जरूरत को कितनी कुशलता से संभाल पाती हैं।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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