अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। गुरुवार को सोने की कीमतों में 76 डॉलर प्रति औंस की तेज छलांग देखने को मिली, जबकि चांदी करीब 5 डॉलर प्रति औंस तक उछल गई। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद, कमजोर होता डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट माना जा रहा है।
वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों का फोकस अब अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती पर टिक गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की जोरदार छलांग
COMEX पर गोल्ड फ्यूचर्स में गुरुवार को 76 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस की तेजी आई। इसके साथ कीमतें इंट्राडे कारोबार में 4,770 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गईं। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी सोने में 2.75% की मजबूत तेजी दर्ज हुई थी, जो मार्च के बाद सबसे बड़ी दैनिक बढ़त मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेतों ने निवेशकों को फिर से कीमती धातुओं की ओर आकर्षित किया है। हालांकि आमतौर पर तनाव बढ़ने पर सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार डॉलर में कमजोरी और ब्याज दर कटौती की उम्मीदों ने बाजार की दिशा तय की।
चांदी ने दिखाया ज्यादा दम
सोने के मुकाबले चांदी में और भी बड़ी तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिल्वर की कीमत करीब 5 डॉलर उछलकर 82.43 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। इससे पहले बुधवार को भी चांदी में लगभग 5% की तेजी आई थी।
सिर्फ इस सप्ताह की बात करें तो चांदी अब तक करीब 7.8% मजबूत हो चुकी है। इंडस्ट्रियल डिमांड और कमजोर डॉलर का फायदा चांदी को सबसे ज्यादा मिल रहा है। बाजार जानकारों का कहना है कि अगर वैश्विक आर्थिक संकेत इसी तरह बने रहे तो आने वाले दिनों में चांदी सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद ने बदला माहौल
पश्चिम एशिया में दो महीने से जारी तनाव के बीच अब समझौते की संभावनाएं बढ़ती दिख रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अमेरिका के उस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है जिसमें संघर्ष समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि समझौता नहीं होने पर ईरान को नए हमलों का सामना करना पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। इसलिए वहां तनाव कम होने की खबरों ने कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया।
कच्चे तेल में गिरावट से बाजार को राहत
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गुरुवार को करीब 5 डॉलर की गिरावट आई और यह 96.32 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया। इससे पहले सप्ताह की शुरुआत में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया था।
तेल की कीमतों में नरमी आने से महंगाई को लेकर चिंता थोड़ी कम हुई है। यही वजह है कि बाजार अब फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में कटौती की संभावना को फिर मजबूत मानने लगा है।
कमजोर डॉलर बना सोने-चांदी की तेजी का बड़ा कारण
डॉलर इंडेक्स 98 के नीचे फिसल गया, जिसका सीधा फायदा सोना और चांदी जैसी कमोडिटी को मिला। जब डॉलर कमजोर होता है तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक डॉलर की कमजोरी फिलहाल कीमती धातुओं के लिए सबसे बड़ा सपोर्ट फैक्टर बनी हुई है। अगर अमेरिकी रोजगार आंकड़े कमजोर आते हैं तो डॉलर पर और दबाव बन सकता है।
MCX पर सोने में ₹1,700 से ज्यादा की तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार की तेजी का असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दिया। MCX पर निकट अवधि वाले गोल्ड फ्यूचर्स में ₹1,733 की तेजी दर्ज की गई और कीमतें ₹1,53,865 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं।
इससे पहले पिछले सत्र में भी सोना ₹2,379 मजबूत हुआ था, जो अप्रैल के बाद सबसे बड़ी दैनिक बढ़त थी। लगातार बढ़ती कीमतों ने निवेशकों और ज्वेलरी कारोबारियों दोनों का ध्यान खींचा है।
चांदी ने फिर पार किया ₹2.65 लाख का स्तर
MCX पर सिल्वर फ्यूचर्स में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कीमतें ₹12,235 प्रति किलो बढ़कर ₹2,65,500 प्रति किलो तक पहुंच गईं। सिर्फ इस सप्ताह चांदी में ₹13,500 प्रति किलो की बढ़त दर्ज की जा चुकी है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक मांग मजबूत रहने और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते चांदी में अभी और तेजी की संभावना बनी हुई है।
अब बाजार की नजर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर
अब निवेशकों की नजर शुक्रवार को आने वाली अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट पर टिकी है। यह रिपोर्ट तय करेगी कि फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है।
हालांकि फेड अधिकारियों ने अभी भी महंगाई को लेकर चिंता जताई है। शिकागो फेड के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी और सेंट लुईस फेड के अध्यक्ष अल्बर्टो मुसालेम ने कहा कि महंगाई अभी भी 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।
अगर अमेरिकी आंकड़े कमजोर आते हैं तो ब्याज दर कटौती की उम्मीद और मजबूत हो सकती है, जिसका सीधा फायदा सोने और चांदी को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच सोना और चांदी फिर से सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर मजबूत होते दिख रहे हैं। कमजोर डॉलर, गिरता कच्चा तेल और संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीद फिलहाल कीमती धातुओं के पक्ष में माहौल बना रही है।
हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे बड़ी खरीदारी से पहले वैश्विक घटनाक्रम और फेडरल रिजर्व की अगली रणनीति पर नजर बनाए रखें, क्योंकि बाजार में अस्थिरता अभी भी काफी ज्यादा बनी हुई है।
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