अमेरिका में आयोजित 2026 SelectUSA Investment Summit इस बार केवल एक निवेश सम्मेलन नहीं रहा, बल्कि यह भारत–अमेरिका आर्थिक रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत बन गया है। भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में जिस पैमाने पर निवेश किया है, उसने न सिर्फ अमेरिकी प्रशासन को चौंका दिया, बल्कि वैश्विक निवेश परिदृश्य में भारत की स्थिति को और मजबूत कर दिया है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस निवेश प्रवाह को “अब तक का सबसे बड़ा भारतीय निवेश संकेत” बताते हुए इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी जीत करार दिया है।
भारत से अमेरिका में रिकॉर्ड निवेश का खुलासा
BIG NEWS coming! Massive new investments from India are flowing into the United States at the 2026 #SelectUSASummit – the largest we've ever seen. This is what a true win looks like for the American economy. Details soon! pic.twitter.com/vinQEjAPVy
— Ambassador Sergio Gor (@USAmbIndia) May 5, 2026 SelectUSA Summit के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार, भारत से अमेरिका में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लगभग 16.4 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा न सिर्फ बड़े स्तर के पूंजी प्रवाह को दिखाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय कंपनियां अब ग्लोबल विस्तार में अमेरिका को एक प्रमुख केंद्र मान रही हैं।
अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार, इस निवेश से लगभग 70,800 नौकरियों को समर्थन मिला है, जो अमेरिकी रोजगार बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
R&D और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़ा दांव
भारतीय कंपनियों ने केवल निवेश ही नहीं किया, बल्कि अमेरिका में अनुसंधान और विकास (R&D) को भी बड़ा समर्थन दिया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- R&D निवेश: लगभग 330 मिलियन डॉलर
- निर्यात समर्थन: करीब 1.5 अरब डॉलर
- रोजगार सृजन: 70,800 से अधिक नौकरियां
यह दर्शाता है कि भारतीय कंपनियां अब केवल बाजार विस्तार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हाई-टेक इनोवेशन और रिसर्च इकोसिस्टम का हिस्सा भी बन रही हैं।
SelectUSA Summit में भारत की मजबूत मौजूदगी
मैरीलैंड के नेशनल हार्बर में आयोजित इस सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधियों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण रही। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ब्रैंडन रेमिंगटन ने भारत को “अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण निवेश साझेदार” बताया।
उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों का योगदान सिर्फ पूंजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और रोजगार संरचना को भी मजबूत कर रहा है।
पहले से मजबूत होता निवेश ट्रेंड
2023 की CII रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में भारतीय निवेश पहले ही लगभग 40 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका था। इससे करीब 4.25 लाख नौकरियों का सृजन हुआ था।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि:
- भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 1 अरब डॉलर से अधिक R&D निवेश किया
- CSR गतिविधियों में लगभग 195 मिलियन डॉलर का योगदान दिया
यह स्पष्ट करता है कि भारतीय कंपनियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक रणनीतिक भूमिका निभा रही हैं।
भारत–अमेरिका आर्थिक रिश्तों में नया मोड़
SelectUSA Summit में सामने आया यह निवेश प्रवाह केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत भी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अब:
- केवल “इमर्जिंग मार्केट” नहीं रहा
- बल्कि एक ग्लोबल कैपिटल एक्सपोर्टर बन रहा है
अमेरिका के लिए यह निवेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी और रोजगार सभी क्षेत्रों में मजबूती मिलती है।
रणनीतिक दृष्टिकोण से क्या मतलब है?
भारत का अमेरिका में बढ़ता निवेश तीन बड़े संकेत देता है:
- ग्लोबल एक्सपेंशन स्ट्रेटजी – भारतीय कंपनियां अब घरेलू बाजार से बाहर तेज़ी से विस्तार कर रही हैं
- टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन – R&D निवेश से भारत–अमेरिका टेक सहयोग मजबूत हो रहा है
- जियोइकोनॉमिक प्रभाव – भारत अब वैश्विक निवेश निर्णयों में प्रभावी भूमिका निभा रहा है
निष्कर्ष
SelectUSA Summit 2026 भारत के लिए केवल एक निवेश इवेंट नहीं था, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक मंच पर उसकी बढ़ती ताकत का प्रमाण बन गया है।
16.4 अरब डॉलर का FDI, हजारों नौकरियां और अरबों डॉलर का R&D निवेश यह दर्शाते हैं कि भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में सिर्फ भागीदार नहीं, बल्कि एक प्रमुख निवेश शक्ति बन चुका है।
यह ट्रेंड आने वाले वर्षों में भारत–अमेरिका आर्थिक रिश्तों को और गहराई देगा और वैश्विक निवेश मैप को फिर से परिभाषित कर सकता है।
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