नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2026: नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने शनिवार को कहा कि भारत जैसे विशाल देश में “विकसित भारत (Viksit Bharat)” का लक्ष्य हासिल करना एक बेहद जटिल और दीर्घकालिक प्रक्रिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका डेटा-आधारित नीति निर्माण (Data-driven planning) और मजबूत कार्यान्वयन तंत्र की होगी।
लाहिड़ी ने यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में कही। उन्होंने बताया कि यह उनकी नियुक्ति के बाद प्रधानमंत्री के साथ पहली औपचारिक बैठक थी, जिसमें उन्होंने सरकार द्वारा दिए गए विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया।
नीति आयोग की भूमिका पर बड़ा बयान
अशोक लाहिड़ी ने कहा कि नीति आयोग केवल एक सलाहकार संस्था नहीं है, बल्कि यह देश की विकास नीति को दिशा देने वाला एक केंद्रीय स्तंभ है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद जब योजना आयोग को समाप्त कर नीति आयोग की स्थापना की गई, तब यह एक “संस्थागत बदलाव” था जिसने शासन की सोच को बदल दिया।
उनके अनुसार नीति आयोग तीन प्रमुख कार्य करता है—
- नीतियों का निर्माण (Policy formulation)
- उनके क्रियान्वयन की निगरानी (Monitoring implementation)
- केंद्र और राज्यों को नीति संबंधी सलाह देना
लाहिड़ी ने कहा कि यह मॉडल भारत को “वन-साइज़-फिट्स-ऑल” नीति से हटाकर अधिक स्थानीय और वास्तविक जरूरतों पर आधारित शासन की ओर ले गया है।
“तीन एन” – नीति आयोग की सफलता का आधार
अपने बयान में लाहिड़ी ने नीति आयोग की कार्यशैली को “तीन एन” पर आधारित बताया—
- NITI
- Nishtha (निष्ठा)
- Niyat (नियत)
उन्होंने कहा कि यदि इन तीन मूल्यों को सही तरीके से अपनाया जाए, तो किसी भी नीति का प्रभाव कई गुना बढ़ सकता है।
उनके अनुसार, केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रति ईमानदार क्रियान्वयन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण ही वास्तविक बदलाव लाता है।
डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस पर फोकस
लाहिड़ी ने अपने बयान में विशेष रूप से “डेटा-ड्रिवन प्लानिंग” पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शासन प्रणाली में डेटा सबसे महत्वपूर्ण संसाधन बन चुका है।
नीति आयोग के तहत चल रहे Aspirational Districts Programme का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि पिछड़े जिलों में सुधार को मापने के लिए अब वास्तविक समय में डेटा एकत्र किया जाता है।
इससे यह पता चलता है कि—
- स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ या नहीं
- शिक्षा के स्तर में बदलाव आया या नहीं
- बुनियादी ढांचे की स्थिति कैसी है
लाहिड़ी ने कहा कि यह प्रणाली पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करती है।
“Viksit Bharat सिर्फ GDP नहीं, एक व्यापक दृष्टि है”
लाहिड़ी ने स्पष्ट किया कि “विकसित भारत” केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह अवधारणा कई स्तरों पर आधारित है—
- प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि
- शिक्षा प्रणाली का सुधार
- स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता
- बुनियादी ढांचे का विकास
- जीवन की समग्र गुणवत्ता
उनके अनुसार, किसी भी देश के लिए वास्तविक विकास तभी संभव है जब सामाजिक और आर्थिक दोनों पहलू समान रूप से आगे बढ़ें।
140 करोड़ की आबादी – सबसे बड़ी चुनौती
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि भारत जैसे 140 करोड़ की आबादी वाले देश में नीति लागू करना एक बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि विविधता भारत की ताकत भी है और चुनौती भी। अलग-अलग राज्यों, भाषाओं, आर्थिक स्थितियों और सामाजिक संरचनाओं के कारण नीति निर्माण में लचीलापन जरूरी है।
लाहिड़ी ने कहा:
“भारत में एक ही नीति सभी जगह समान रूप से लागू नहीं हो सकती। हमें क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार नीतियों को ढालना होगा।”
“सोच में बदलाव सबसे जरूरी”
लाहिड़ी ने अपने बयान में एक महत्वपूर्ण बात कही कि भारत को विकसित बनाने के लिए सबसे पहले “माइंडसेट चेंज” जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि नीति निर्माताओं, प्रशासन और नागरिकों में यह विश्वास आ जाए कि लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, तो परिणाम अपने आप सामने आएंगे।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार “Viksit Bharat 2047” विजन पर तेजी से काम कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात और नई जिम्मेदारी
लाहिड़ी ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान अपने नए दायित्व के लिए आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह निर्णय कि योजना आयोग को समाप्त कर नीति आयोग बनाया गया, भारत की शासन प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव था।
उनके अनुसार यह बदलाव निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए किया गया था।
“ग्राउंड लेवल डेटा सबसे महत्वपूर्ण”
लाहिड़ी ने यह भी कहा कि किसी भी नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह जमीन पर कैसे लागू होती है।
उन्होंने जोर दिया कि—
- जमीनी स्तर का डेटा
- वास्तविक समय की रिपोर्टिंग
- और स्थानीय प्रशासन की भागीदारी
नीति निर्माण का सबसे मजबूत आधार हैं।
निष्कर्ष: भारत के विकास मॉडल में बड़ा बदलाव
अशोक कुमार लाहिड़ी के इस बयान को नीति आयोग की आने वाली रणनीति का संकेत माना जा रहा है। उनका फोकस स्पष्ट रूप से “डेटा, डिसेंट्रलाइजेशन और डिलीवरी” पर है।
भारत जैसे बड़े देश में “Viksit Bharat” का लक्ष्य सिर्फ आर्थिक आंकड़ों से नहीं, बल्कि समग्र सामाजिक विकास से तय होगा।
नीति आयोग की भूमिका आने वाले वर्षों में और भी महत्वपूर्ण होने वाली है, खासकर तब जब भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
डिस्क्लेमर
यह लेख सार्वजनिक रिपोर्ट्स और समाचार एजेंसी इनपुट्स पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी समय के साथ अपडेट हो सकती है।
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