तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले चेन्नई की राजनीति अचानक तेज हो गई है। अमित शाह ने रविवार को दक्षिण चेन्नई के मायलापुर इलाके में भव्य रोडशो किया, जहां बड़ी संख्या में समर्थक सड़कों पर उतरे। इस दौरान उन्होंने कपालीश्वरर मंदिर में पूजा-अर्चना भी की, जो इस अभियान को सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर अहम बनाता है।
यह रोडशो केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं था, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में बीजेपी की बढ़ती सक्रियता का संकेत भी माना जा रहा है।
रोडशो में दिखी ताकत, सोशल मीडिया पर संदेश
अमित शाह ने रोडशो के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:
“Mylapore turned saffron today.”
यह बयान साफ तौर पर यह दिखाने की कोशिश है कि:
चेन्नई जैसे पारंपरिक रूप से गैर-BJP गढ़ में भी पार्टी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है
रोडशो में उनके साथ तमिलिसाई सौंदरराजन मौजूद थीं, जो मायलापुर सीट से चुनाव लड़ रही हैं।
कपालीश्वरर मंदिर में दर्शन: क्या है इसका राजनीतिक मतलब?
रोडशो से पहले अमित शाह ने मायलापुर के प्रसिद्ध कपालीश्वरर मंदिर में पूजा की।
इस कदम को कई मायनों में अहम माना जा रहा है:
- स्थानीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ाव दिखाना
- हिंदू वोट बैंक को संदेश देना
- दक्षिण भारत में बीजेपी की पहचान मजबूत करना
तमिलनाडु की राजनीति में धार्मिक पहचान हमेशा संवेदनशील मुद्दा रही है, इसलिए इस तरह के प्रतीकात्मक कदम चुनावी रणनीति का हिस्सा माने जाते हैं।
DMK पर हमला: “परिवारवाद और भ्रष्टाचार”
अपने भाषण में अमित शाह ने एम.के. स्टालिन और DMK सरकार पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया:
- राज्य में “परिवारवाद” हावी है
- सरकार का फोकस विकास के बजाय सत्ता को परिवार में बनाए रखना है
उन्होंने कहा:
“पहले करुणानिधि, फिर स्टालिन, अब उनके बेटे—यह परिवारवाद तमिलनाडु के लोगों के लिए अच्छा नहीं है।”
यह बयान सीधे तौर पर उधयनिधि स्टालिन की ओर इशारा माना जा रहा है।
BJP का दावा: “भ्रष्टाचार खत्म करेंगे”
भारतीय जनता पार्टी को “विकल्प” के रूप में पेश करते हुए अमित शाह ने कहा कि:
- NDA सरकार बनने पर DMK का भ्रष्टाचार खत्म किया जाएगा
- पारदर्शी शासन दिया जाएगा
उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि:
बीजेपी उम्मीदवारों को भारी मतों से जिताएं
महिलाओं का मुद्दा भी केंद्र में
अमित शाह ने अपने भाषण में महिला आरक्षण और महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- कांग्रेस पार्टी और DMK ने महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली
- संसद में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के प्रयासों को रोका
साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता दोहराई कि:
महिलाओं को न्याय और अवसर दिए जाएंगे
तमिलनाडु चुनाव 2026: क्या है दांव पर?
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है और 4 मई को नतीजे आएंगे।
यह चुनाव कई कारणों से अहम है:
- DMK अपनी सत्ता बरकरार रखना चाहती है
- बीजेपी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है
- कांग्रेस और अन्य दल गठबंधन के जरिए मुकाबला कर रहे हैं
क्या BJP बना पाएगी जगह?
तमिलनाडु में बीजेपी पारंपरिक रूप से कमजोर रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में:
- पार्टी ने संगठन मजबूत किया है
- स्थानीय नेताओं को आगे बढ़ाया है
- राष्ट्रीय मुद्दों को राज्य की राजनीति से जोड़ने की कोशिश की है
मायलापुर जैसे शहरी क्षेत्रों में रोडशो यह संकेत देते हैं कि:
बीजेपी अब दक्षिण भारत में भी आक्रामक रणनीति अपना रही है
चुनावी रणनीति: प्रतीक + मुद्दे + आक्रामक अभियान
अगर इस पूरे रोडशो और भाषण को एक साथ देखें, तो बीजेपी की रणनीति साफ दिखती है:
- प्रतीकात्मक राजनीति → मंदिर दर्शन
- मुद्दों की राजनीति → भ्रष्टाचार, महिला अधिकार
- आक्रामक अभियान → रोडशो, बड़े बयान
यह तीनों मिलकर एक मजबूत चुनावी नैरेटिव बनाने की कोशिश हैं।
निष्कर्ष: चेन्नई से संदेश, पूरे तमिलनाडु के लिए संकेत
मायलापुर का यह रोडशो सिर्फ एक स्थानीय अभियान नहीं था—यह पूरे तमिलनाडु के लिए एक राजनीतिक संदेश था।
अमित शाह ने साफ कर दिया है कि बीजेपी इस बार चुनाव में पूरी ताकत झोंकने जा रही है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि:
क्या यह आक्रामक अभियान वोटों में बदलता है
या DMK अपनी पकड़ बरकरार रखती है
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