India-New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब लागू होने की दिशा में आगे बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच यह समझौता अप्रैल 2026 में हुआ था और अब इसके अगले महीने यानी अक्टूबर से लागू होने की उम्मीद है। इस ट्रेड डील का सबसे बड़ा फायदा भारतीय निर्यातकों को मिलने वाला है, क्योंकि न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों को 100% शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच देने पर सहमत हुआ है।
वहीं, भारत ने भी न्यूजीलैंड के करीब 95% निर्यात उत्पादों पर शुल्क में कटौती या उसे खत्म करने का फैसला किया है। हालांकि, डेयरी और कई संवेदनशील कृषि उत्पादों को समझौते से बाहर रखा गया है, ताकि घरेलू किसानों और कृषि उद्योग पर विदेशी प्रतिस्पर्धा का सीधा दबाव न पड़े।
भारत-न्यूजीलैंड FTA में क्या है खास?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता के बाद दोनों देशों ने 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
अब दोनों देश इसके लागू होने की तारीख पर आपसी सहमति से फैसला करेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके अक्टूबर 2026 से लागू होने की उम्मीद है।
FTA लागू होने के बाद भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में अपने उत्पाद बेचने में ज्यादा आसानी होगी। खासतौर पर उन सामानों को फायदा मिलेगा जिन पर अभी आयात शुल्क लागू है।
भारतीय एक्सपोर्टर्स को मिलेगा 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस
इस समझौते का भारत के लिए सबसे बड़ा फायदा न्यूजीलैंड में मिलने वाली 100% शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच है।
इसके तहत भारत के 8,200 से ज्यादा टैरिफ लाइन वाले उत्पादों को न्यूजीलैंड में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने की बात कही गई है। इनमें कई प्रमुख निर्यात क्षेत्र शामिल हैं।
इन सेक्टर्स को मिल सकता है फायदा
- टेक्सटाइल और गारमेंट
- लेदर और फुटवियर
- इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स
- प्रोसेस्ड फूड
- फार्मास्यूटिकल्स
- जेम्स एंड ज्वेलरी
- अन्य मैन्युफैक्चरिंग उत्पाद
अभी न्यूजीलैंड की ओर से कुछ भारतीय उत्पादों पर 10% तक का शुल्क लगाया जाता था। इनमें सिरेमिक, कालीन, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे उत्पाद शामिल हैं। FTA के बाद भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।
न्यूजीलैंड भारत में लगाएगा 20 अरब डॉलर तक का निवेश
ट्रेड के अलावा इस समझौते में निवेश को भी काफी महत्व दिया गया है। न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर तक निवेश को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई है।
इस निवेश से मैन्युफैक्चरिंग, इन्वेस्टमेंट, एग्री-प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और दूसरे कारोबारी क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं और छोटे एवं मध्यम कारोबारों यानी MSME सेक्टर को भी फायदा मिल सकता है।
दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार को आने वाले वर्षों में बढ़ाने का लक्ष्य भी इस समझौते का अहम हिस्सा है।
किसानों के लिए क्या है इस FTA में?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच समझौते में किसानों के हितों को लेकर खास सावधानी बरती गई है। भारत ने डेयरी और कई संवेदनशील कृषि उत्पादों को FTA की शुल्क कटौती से बाहर रखा है।
इनमें दूध, क्रीम, पनीर, दही और कुछ अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं। मसाले और चीनी जैसे कुछ संवेदनशील उत्पादों को भी संरक्षण दिया गया है।
इसका मकसद यह है कि न्यूजीलैंड से आने वाले सस्ते कृषि और डेयरी उत्पाद सीधे भारतीय किसानों और घरेलू उद्योगों के लिए बड़ी प्रतिस्पर्धा न बन जाएं।
यानी भारत ने इस ट्रेड डील में जहां निर्यात बढ़ाने के लिए बड़े बाजार का रास्ता खोला है, वहीं घरेलू कृषि क्षेत्र के संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षा देने की कोशिश भी की है।
न्यूजीलैंड के किन उत्पादों को भारत में फायदा मिलेगा?
भारत ने न्यूजीलैंड के करीब 95% निर्यात उत्पादों पर शुल्क में कटौती या उसे खत्म करने पर सहमति जताई है।
इससे न्यूजीलैंड के कई उत्पादों के भारतीय बाजार में प्रवेश की लागत कम हो सकती है। ऊन, कोयला, वानिकी और लकड़ी से जुड़े उत्पाद, भेड़ का मांस और कुछ अन्य सामानों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।
बागवानी क्षेत्र में न्यूजीलैंड के कीवी, सेब, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे उत्पादों को भी अवसर मिल सकता है।
हालांकि, भारत ने डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण देने का फैसला किया है, जिससे घरेलू डेयरी उद्योग को अचानक बढ़ने वाली विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाया जा सके।
भारतीय किसानों के लिए सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, सहयोग भी
FTA में कृषि सहयोग से जुड़ी योजनाओं को भी जगह दी गई है। इसके तहत न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता और तकनीकी सहयोग का इस्तेमाल भारतीय कृषि क्षेत्र में किया जा सकता है।
खास तौर पर कीवी और सेब की खेती जैसे क्षेत्रों में किसानों को बेहतर तकनीक, उत्पादन और बागवानी से जुड़ी जानकारी देने पर सहयोग की संभावना है।
इस तरह समझौते का फोकस सिर्फ आयात-निर्यात पर नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र में तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर भी है।
5 साल में 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार अभी अपेक्षाकृत कम स्तर पर है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर करीब 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार करीब 1.3 अरब डॉलर रहा। वहीं, 2024 में वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर कुल व्यापार लगभग 2.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
FTA के जरिए दोनों सरकारें व्यापार के इस आंकड़े को तेजी से बढ़ाना चाहती हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है न्यूजीलैंड FTA?
भारत लगातार अलग-अलग देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए अपने निर्यात बाजार का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है। न्यूजीलैंड के साथ FTA भी इसी रणनीति का हिस्सा है।
भारतीय कंपनियों के लिए न्यूजीलैंड में ड्यूटी-फ्री पहुंच से उनके उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धी हो सकती है। इसका फायदा खासतौर पर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, फार्मा, लेदर, जेम्स-ज्वेलरी और प्रोसेस्ड फूड जैसे सेक्टर को मिल सकता है।
दूसरी ओर, भारत में न्यूजीलैंड के निवेश से उत्पादन और लॉजिस्टिक्स जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
निष्कर्ष
भारत-न्यूजीलैंड FTA दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जहां भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100% शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने वाली है, वहीं न्यूजीलैंड की ओर से भारत में 20 अरब डॉलर तक निवेश की प्रतिबद्धता इस समझौते को और अहम बनाती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत ने डेयरी समेत कई संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को समझौते से बाहर रखा है। इससे सरकार ने निर्यात और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।


