धान खरीद 2026: खरीफ सीजन में धान की सरकारी खरीद को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। सरकार इस साल किसानों से 708.64 लाख टन धान खरीदने की योजना बना रही है। हालांकि यह मात्रा पिछले खरीफ सीजन में हुई खरीद की तुलना में करीब 102 लाख टन कम है। सरकार ने यह फैसला सरकारी गोदामों में पहले से मौजूद चावल के पर्याप्त भंडार को ध्यान में रखते हुए लिया है।
सरकार का कहना है कि केंद्रीय पूल में चावल का स्टॉक जरूरत से काफी अधिक है। ऐसे में नई फसल की खरीद और मौजूदा भंडार के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि किसानों से MSP पर धान की सरकारी खरीद बंद या खत्म की जा रही है।
खरीफ सीजन में 708.64 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, इस खरीफ सीजन में करीब 708.64 लाख टन धान खरीदने का शुरुआती अनुमान लगाया गया है। पिछले खरीफ सीजन में सरकार ने लगभग 810.72 लाख टन धान की खरीद की थी।
इस हिसाब से इस बार अनुमानित सरकारी खरीद करीब 102 लाख टन कम है। इसे किसानों की MSP खरीद में बड़ी कटौती के बजाय सरकारी भंडार की स्थिति के मुताबिक खरीद को संतुलित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार के सामने एक तरफ किसानों से उनकी उपज की खरीद सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी गोदामों में पहले से मौजूद खाद्यान्न के भंडारण और प्रबंधन की चुनौती भी है।
सरकारी गोदामों में पिछले साल से ज्यादा चावल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक केंद्रीय पूल में इस समय करीब 402 लाख टन चावल उपलब्ध है। पिछले साल 1 अगस्त के आसपास यह स्टॉक लगभग 380 लाख टन था।
यानी इस साल सरकारी भंडार में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 6 प्रतिशत ज्यादा चावल मौजूद है।
यह स्थिति सरकार के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्रीय पूल में उपलब्ध चावल का भंडार निर्धारित न्यूनतम बफर मानक से काफी ऊपर है।
न्यूनतम बफर मानक से करीब तीन गुना ज्यादा स्टॉक
जुलाई के लिए चावल का न्यूनतम बफर स्टॉक करीब 135.40 लाख टन निर्धारित है। इसके मुकाबले केंद्रीय पूल में लगभग 402 लाख टन चावल मौजूद है।
इस तरह सरकारी स्टॉक न्यूनतम निर्धारित मानक के करीब तीन गुना के स्तर पर है।
अगर सरकार पिछले साल की तरह ही 810 लाख टन से ज्यादा धान खरीदती, तो उससे चावल में बदलने के बाद सरकारी गोदामों में खाद्यान्न का स्टॉक और बढ़ सकता था। इससे भंडारण क्षमता पर दबाव बढ़ने की संभावना थी।
इसी वजह से इस साल शुरुआती खरीद लक्ष्य को पिछले साल की वास्तविक खरीद से कम रखा गया है।
खरीद का वास्तविक आंकड़ा 708 लाख टन से ज्यादा भी हो सकता है
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि 708.64 लाख टन अंतिम खरीद आंकड़ा जरूरी नहीं है। यह सरकार का शुरुआती अनुमान है।
खरीफ सीजन के दौरान किसानों की बिक्री, मंडियों में धान की आवक, खुले बाजार में कीमतों और सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों की भागीदारी जैसे कई कारक वास्तविक खरीद को प्रभावित करेंगे।
अगर किसानों की ओर से MSP पर धान बेचने की मांग ज्यादा रहती है और खरीद की जरूरत बढ़ती है, तो वास्तविक सरकारी खरीद शुरुआती अनुमान से ऊपर भी जा सकती है।
धान के रकबे में भी आई कमी
इस साल धान की खेती के रकबे में भी कमी दर्ज की गई है। बारिश में कमी के कारण धान का कुल बुवाई क्षेत्र करीब 3.35 प्रतिशत घटा है।
हालांकि सरकारी खरीद में अनुमानित कमी को सिर्फ धान के रकबे में आई गिरावट से जोड़ना सही नहीं होगा।
सरकारी खरीद कई चीजों पर निर्भर करती है। इनमें किसानों की कुल पैदावार, MSP पर बेचने की इच्छा, सरकारी खरीद केंद्रों की उपलब्धता और खुले बाजार में मिलने वाला भाव प्रमुख हैं।
यदि खुले बाजार में किसानों को MSP से बेहतर कीमत मिलती है तो सरकारी खरीद केंद्रों पर बिक्री कम हो सकती है। वहीं बाजार भाव कमजोर रहने पर MSP खरीद के लिए सरकारी केंद्रों पर आवक बढ़ सकती है।
MSP पर जारी रहेगी धान की खरीद
सरकार के खरीद लक्ष्य में कमी को लेकर किसानों के बीच यह सवाल उठ सकता है कि क्या MSP पर धान की सरकारी खरीद कम हो जाएगी। लेकिन शुरुआती लक्ष्य कम होने का मतलब MSP खरीद बंद होना नहीं है।
सरकार तय नियमों और गुणवत्ता मानकों के अनुसार किसानों से धान की खरीद करेगी।
इस साल सामान्य धान का MSP ₹2,369 प्रति क्विंटल है। यानी पात्र और निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने वाला धान सरकारी खरीद केंद्रों पर MSP के आधार पर खरीदा जाएगा।
सरकारी योजनाओं के लिए भी चावल की जरूरत
सरकार के पास पहले से चावल का बड़ा स्टॉक जरूर है, लेकिन सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए लगातार चावल की आवश्यकता रहती है।
इसलिए सरकार के लिए धान की खरीद को बहुत ज्यादा कम करना भी व्यावहारिक नहीं होगा। यही वजह है कि इस साल का खरीद अनुमान मौजूदा स्टॉक और भविष्य की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
किसानों के लिए क्या मायने रखता है?
धान खरीद का लक्ष्य पिछले साल की तुलना में कम होने के बावजूद किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि MSP पर सरकारी खरीद की व्यवस्था जारी रहेगी।
किसानों को अपनी उपज बेचते समय स्थानीय मंडी के भाव, सरकारी खरीद केंद्र की व्यवस्था और धान की गुणवत्ता से जुड़े नियमों की जानकारी रखना जरूरी होगा। वास्तविक सरकारी खरीद कितनी होती है, यह खरीफ सीजन में धान की आवक और किसानों की बिक्री पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष: सरकारी गोदामों में पहले से मौजूद चावल के बड़े स्टॉक को देखते हुए केंद्र ने खरीफ सीजन में 708.64 लाख टन धान खरीद का शुरुआती लक्ष्य तय किया है। यह पिछले साल की खरीद से कम जरूर है, लेकिन इसका मतलब MSP खरीद को खत्म करना नहीं है। सामान्य धान के लिए ₹2,369 प्रति क्विंटल MSP के आधार पर तय गुणवत्ता वाला धान सरकारी खरीद व्यवस्था के तहत खरीदा जाएगा।


