नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत जारी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारत इस डील को तभी अंतिम रूप देगा, जब अमेरिका भारतीय उत्पादों को उसके प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर और प्रतिस्पर्धी टैरिफ दर उपलब्ध कराएगा।
गोयल ने ‘Leveraging FTAs Outreach’ कार्यक्रम के तहत आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अपने निर्यातकों के हितों को ध्यान में रखकर व्यापार समझौतों पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ समझौते की अंतिम घोषणा तभी होगी, जब भारत को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ का भरोसा मिलेगा।
बेहतर टैरिफ पर भारत का जोर
India will announce the final details of its Bilateral Trade Agreement (BTA) with the United States only after Washington agrees to offer preferential tariff terms over India's competitors, Commerce and Industry Minister Piyush Goyal said today
"As soon as the US is able to give… pic.twitter.com/fcpYKWEj8s
— ANI (@ANI) September 3, 2026 भारत-अमेरिका ट्रेड डील में टैरिफ एक अहम मुद्दा बना हुआ है। भारत चाहता है कि उसके निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर बाजार पहुंच मिले। इससे भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में अपने उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत पर बेचने का रास्ता खुल सकता है।
पीयूष गोयल के मुताबिक, जैसे ही अमेरिका भारत को उसके प्रतिस्पर्धियों से बेहतर टैरिफ दर देने की स्थिति में होगा, दोनों पक्ष BTA को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
भारत का रुख साफ है कि किसी भी व्यापार समझौते से घरेलू उद्योग, किसान, निर्यातक और कारोबारी हित प्रभावित नहीं होने चाहिए। इसी वजह से बाजार पहुंच और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर बातचीत को अहम माना जा रहा है।
कई देशों के साथ व्यापार समझौतों की तैयारी
भारत केवल अमेरिका के साथ ही व्यापार समझौते पर बातचीत नहीं कर रहा है। आने वाले समय में कई देशों और व्यापारिक समूहों के साथ समझौते की दिशा में काम आगे बढ़ाने की योजना है।
इनमें कनाडा, मेक्सिको, चिली, मर्कोसुर, दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (SACU), खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और इजरायल शामिल हैं।
इन व्यापार समझौतों का मुख्य उद्देश्य भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए नए विदेशी बाजार खोलना, निर्यात बढ़ाना और भारतीय कारोबारियों को वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना है।
भारत-अमेरिका बातचीत कहां तक पहुंची?
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। 22 से 24 जून के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि एंबेसडर जेमिसन ग्रीर के भारत दौरे के समय उन्होंने पीयूष गोयल के साथ समझौते से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की थी।
बातचीत में मार्केट एक्सेस, डिजिटल ट्रेड, सप्लाई चेन, गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं।
दोनों देशों की कोशिश ऐसे व्यापार समझौते पर पहुंचने की है, जिससे दोनों पक्षों के कारोबारियों के साथ-साथ किसानों, कर्मचारियों और उपभोक्ताओं को भी व्यावहारिक लाभ मिल सके।
अमेरिका भारत का अहम व्यापारिक साझेदार
अमेरिका भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। 2025 में भारत का अमेरिका को वस्तुओं का निर्यात करीब 103.82 अरब डॉलर रहा, जबकि अमेरिका से भारत ने लगभग 45.6 अरब डॉलर की वस्तुओं का आयात किया। इस तरह दोनों देशों के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार करीब 149.42 अरब डॉलर रहा।
सेवाओं के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है। 2025 में भारत और अमेरिका के बीच सेवाओं का कुल व्यापार करीब 92.23 अरब डॉलर रहा। भारत ने अमेरिका को लगभग 48.67 अरब डॉलर की सेवाओं का निर्यात किया, जबकि अमेरिका से करीब 43.56 अरब डॉलर की सेवाओं का आयात किया।
फरवरी में बना था अंतरिम समझौते का फ्रेमवर्क
भारत और अमेरिका ने फरवरी में पारस्परिक लाभ पर आधारित एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए फ्रेमवर्क की घोषणा की थी। इसके साथ दोनों देशों ने व्यापक Bilateral Trade Agreement (BTA) पर बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता भी जताई थी।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि दोनों देश टैरिफ और बाजार पहुंच जैसे अहम मुद्दों पर कब सहमति बनाते हैं। पीयूष गोयल के बयान से साफ है कि भारत बेहतर टैरिफ शर्तों के बिना ट्रेड डील को जल्दबाजी में अंतिम रूप देने के पक्ष में नहीं है।


