Who is Manish Brahmbhatt: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में अंदरूनी विवाद के बाद सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने अपनी अलग राजनीतिक राह चुन ली है। उन्होंने गुरुवार, 3 सितंबर को कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक (CJP-D) के गठन का ऐलान किया। ब्रह्मभट्ट ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व और पार्टी के मौजूदा संगठनात्मक ढांचे पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी में आंदोलन से जुड़े जमीनी कार्यकर्ताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया और संगठन पर आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े लोगों का प्रभाव बढ़ गया है।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने बनाई नई पार्टी
#WATCH | Delhi: Founder CJP- Democratic, Manish Brahmbhatt says, "Today, we are launching the 'Cockroach Janata Party Democratic'… Why did we have to do this? The movement belonged to the nation; it succeeded because people poured their blood and sweat into it. However, after… pic.twitter.com/qt0OnWLrzM
— ANI (@ANI) September 3, 2026 कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के तौर पर हुई थी। बाद में पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली में छात्र-युवा आंदोलन के साथ यह संगठन चर्चा में आया। आंदोलन के विस्तार के बाद CJP ने इसे देशभर में ले जाने की योजना भी बनाई।
इसी संगठन में अब अंदरूनी मतभेद सामने आए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और CJP से जुड़े रहे मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक (CJP-D) के गठन की घोषणा की।
पीटीआई के मुताबिक, ब्रह्मभट्ट ने कहा कि नई पार्टी आंदोलन में शामिल रहे स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों की सामूहिक ताकत को एकजुट करने की कोशिश करेगी। उनका कहना है कि आंदोलन जिन लोगों की भागीदारी से खड़ा हुआ, उन्हें संगठन के फैसलों और नेतृत्व में भी उचित स्थान मिलना चाहिए।
अभिजीत दीपके पर लगाए गंभीर आरोप
मनीष ब्रह्मभट्ट ने CJP के मौजूदा नेतृत्व पर आरोप लगाया कि पार्टी अपने मूल छात्र आंदोलन से दूर होती जा रही है। उन्होंने दावा किया कि संगठन की नई राष्ट्रीय कार्यसमिति में आंदोलन से जुड़े जमीनी कार्यकर्ताओं को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि नई टीम में आम आदमी पार्टी से जुड़े कई लोगों को जगह दी गई, जबकि आंदोलन में शामिल रहे दूसरे राजनीतिक दलों से जुड़े स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों को ही संगठन में क्यों शामिल किया गया?
हालांकि, ये सभी दावे मनीष ब्रह्मभट्ट के आरोप हैं। CJP और अभिजीत दीपके की ओर से इन आरोपों पर क्या जवाब दिया गया है, यह अलग से महत्वपूर्ण होगा।
किन राजनीतिक दलों के लोग आंदोलन में हुए थे शामिल?
ब्रह्मभट्ट के मुताबिक, CJP से जुड़े आंदोलन में अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा वाले लोग शामिल हुए थे। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों से जुड़े लोगों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था।
उनका कहना है कि आंदोलन की व्यापक भागीदारी को देखते हुए संगठन की नई टीम में भी उसी तरह का प्रतिनिधित्व होना चाहिए था।
ब्रह्मभट्ट ने कहा कि CJP-D में निर्णय लेने की प्रक्रिया को ज्यादा लोकतांत्रिक बनाने की कोशिश की जाएगी और स्वयंसेवकों तथा आंदोलनकारियों को संगठन के फैसलों में शामिल किया जाएगा।
कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?
मनीष ब्रह्मभट्ट सामाजिक कार्यकर्ता हैं और CJP आंदोलन से जुड़े प्रमुख वालंटियर और कोऑर्डिनेटर के तौर पर सामने आए हैं। हालांकि, चुनावी राजनीति में उनका प्रवेश नया नहीं है।
उन्होंने 2022 का गुजरात विधानसभा चुनाव पालनपुर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, ब्रह्मभट्ट को इस चुनाव में 964 वोट मिले थे, जो कुल मतों का करीब 0.53 प्रतिशत था। वह चुनाव में पांचवें स्थान पर रहे थे।
पालनपुर सीट पर बीजेपी के अनिकेत गिरीशभाई ठाकर ने 95,588 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी।
इस तरह CJP के भीतर मौजूदा विवाद के बाद मनीष ब्रह्मभट्ट का नाम एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आया है।
क्या है मनीष ब्रह्मभट्ट की पढ़ाई और पेशेवर पृष्ठभूमि?
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के MyNeta प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान मनीष ब्रह्मभट्ट की उम्र 37 वर्ष थी और वह मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर काम कर रहे थे।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से B.Com और F.Y. LLB की पढ़ाई की है।
कितनी संपत्ति है मनीष ब्रह्मभट्ट के पास?
चुनावी हलफनामे के अनुसार, 2022 में मनीष ब्रह्मभट्ट ने करीब 44.42 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की थी। हलफनामे में उन्होंने कोई देनदारी या कर्ज नहीं बताया था।
उनके चुनावी हलफनामे में कुछ आपराधिक मामले भी लंबित होने की जानकारी दी गई थी। इनमें IPC की विभिन्न धाराओं के तहत मामले शामिल थे। इन धाराओं में 325, 505(2), 114, 323, 153, 501 और 502 जैसी धाराएं शामिल थीं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ये मामले लंबित बताए गए थे और केवल हलफनामे में दर्ज आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
CJP में विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
CJP में विवाद उस समय खुलकर सामने आया जब अगस्त में संगठन ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी और शीर्ष नेतृत्व की घोषणा की।
इसमें अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को सह-संयोजक बनाया गया।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने इस संगठनात्मक बदलाव का विरोध किया। उनका दावा है कि छात्र-युवा आंदोलन से करीब 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े थे, लेकिन 12 सदस्यीय कोर टीम तैयार करते समय जमीनी स्तर पर काम करने वाले कई कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
यही विवाद धीरे-धीरे संगठन के भीतर बड़े टकराव में बदल गया।
भूख हड़ताल तक क्यों पहुंचा विवाद?
अगस्त में जब अभिजीत दीपके ने अपने आवास पर कोर टीम की बैठक बुलाई, तब मनीष ब्रह्मभट्ट अपने साथी राहुल पांड्या के साथ विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे।
प्रतिनिधित्व को लेकर असहमति के बाद कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। बताया गया कि स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
ब्रह्मभट्ट का कहना है कि मूल आंदोलन किसी एक व्यक्ति या संगठन का नहीं था, बल्कि देशभर के लोगों की भागीदारी से खड़ा हुआ था। उनका दावा है कि आंदोलन की सफलता में कार्यकर्ताओं ने अपना समय, मेहनत और संसाधन लगाए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के सफल होने के बाद उसकी मूल भावना और जमीनी कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है।
अब CJP और CJP-D की राह अलग
मनीष ब्रह्मभट्ट के CJP-D बनाने के ऐलान के बाद अब आंदोलन से निकले इस राजनीतिक मंच के सामने दो अलग-अलग राहें दिखाई दे रही हैं।
एक तरफ अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) है, जबकि दूसरी तरफ मनीष ब्रह्मभट्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक (CJP-D) के नाम से नया संगठन खड़ा करने की घोषणा की है।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि CJP से जुड़े कितने स्वयंसेवक और आंदोलनकारी ब्रह्मभट्ट के नए संगठन के साथ जाते हैं और CJP का मौजूदा नेतृत्व इन आरोपों का क्या जवाब देता है।
फिलहाल, मनीष ब्रह्मभट्ट के इस कदम ने कॉकरोच जनता पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है और अब CJP आंदोलन की आगे की राजनीतिक दिशा पर भी नजर रहेगी।


