Golden Line Metro: दक्षिण दिल्ली के लोगों के लिए मेट्रो कनेक्टिविटी को लेकर बड़ी राहत की खबर है। दिल्ली एयरोसिटी से तुगलकाबाद के बीच बन रहा गोल्डन लाइन मेट्रो कॉरिडोर इस साल के अंत तक चरणबद्ध तरीके से शुरू होने की उम्मीद है। करीब 23.6 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर 15 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसके चालू होने के बाद महिपालपुर, वसंत कुंज, छतरपुर, नेब सराय, साकेत, अंबेडकर नगर, खानपुर और संगम विहार जैसे इलाकों को मेट्रो की बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
Golden Line Metro: दिल्ली में मेट्रो नेटवर्क लगातार विस्तार कर रहा है और अब दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों के लोगों को भी एक नई मेट्रो लाइन का फायदा मिलने वाला है। दिल्ली एयरोसिटी से तुगलकाबाद के बीच तैयार हो रहा गोल्डन लाइन मेट्रो कॉरिडोर दक्षिण दिल्ली के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
करीब 23.6 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर कुल 15 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें 11 स्टेशन भूमिगत और 4 स्टेशन एलिवेटेड होंगे। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह लाइन उन इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगी, जहां फिलहाल सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी सीमित है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के मुताबिक, कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है और इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की तैयारी है। इसके चालू होने से रोजाना सफर करने वाले लोगों के साथ-साथ एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भी काफी फायदा मिलने की उम्मीद है।
किन इलाकों को मिलेगा गोल्डन लाइन का फायदा?
गोल्डन लाइन मेट्रो के शुरू होने के बाद दक्षिण दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी। इस रूट से महिपालपुर, वसंत कुंज, किशनगढ़, छतरपुर, छतरपुर मंदिर, इग्नू, नेब सराय, साकेत, अंबेडकर नगर, खानपुर, संगम विहार और तुगलकाबाद जैसे इलाके जुड़ेंगे।
इस कॉरिडोर का एक बड़ा फायदा उन लोगों को मिलेगा जिन्हें अभी मेट्रो पकड़ने के लिए दूसरे इलाकों तक जाना पड़ता है। नई लाइन शुरू होने के बाद आसपास रहने वाले यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए ज्यादा सुविधाजनक विकल्प मिलेगा।
गोल्डन लाइन का रूट दिल्ली एयरोसिटी से शुरू होकर महिपालपुर, वसंत कुंज, किशनगढ़, छतरपुर, छतरपुर मंदिर, इग्नू, नेब सराय, साकेत जी-ब्लॉक, अंबेडकर नगर, खानपुर, संगम विहार-तिगड़ी, आनंदमयी मार्ग और तुगलकाबाद रेलवे कॉलोनी होते हुए तुगलकाबाद तक पहुंचेगा।
15 स्टेशनों वाला होगा पूरा कॉरिडोर
गोल्डन लाइन कॉरिडोर पर कुल 15 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें अधिकांश स्टेशन भूमिगत होंगे। इससे घनी आबादी और महत्वपूर्ण शहरी इलाकों से होकर गुजरने वाले इस कॉरिडोर को शहर के मौजूदा ढांचे के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा।
गोल्डन लाइन के प्रमुख स्टेशन इस प्रकार हैं:
- दिल्ली एयरोसिटी
- महिपालपुर
- वसंत कुंज
- किशनगढ़
- छतरपुर
- छतरपुर मंदिर
- इग्नू
- नेब सराय
- साकेत जी-ब्लॉक
- अंबेडकर नगर
- खानपुर
- संगम विहार-तिगड़ी
- आनंदमयी मार्ग
- तुगलकाबाद रेलवे कॉलोनी
- तुगलकाबाद
इन स्टेशनों के जरिए दक्षिण दिल्ली के कई प्रमुख रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों को मेट्रो नेटवर्क में शामिल किया जाएगा।
चार बड़े इंटरचेंज से बदलेगा सफर का तरीका
गोल्डन लाइन की सबसे खास बात इसका दूसरे मेट्रो कॉरिडोर से कनेक्शन है। इस लाइन पर कई महत्वपूर्ण इंटरचेंज बनाए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों को दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने में आसानी होगी।
दिल्ली एयरोसिटी पर गोल्डन लाइन की कनेक्टिविटी एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन से होगी। इससे एयरपोर्ट और एयरोसिटी क्षेत्र में आने-जाने वाले यात्रियों को फायदा मिलेगा।
वहीं छतरपुर स्टेशन पर येलो लाइन से कनेक्शन मिलेगा। इससे यात्रियों के लिए दिल्ली के कई महत्वपूर्ण इलाकों तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
इसके अलावा साकेत जी-ब्लॉक पर प्रस्तावित दूसरे कॉरिडोर से कनेक्टिविटी और तुगलकाबाद पर वॉयलेट लाइन से इंटरचेंज की सुविधा मिलेगी।
इस तरह गोल्डन लाइन सिर्फ दक्षिण दिल्ली के स्थानीय यात्रियों के लिए ही उपयोगी नहीं होगी, बल्कि यह दिल्ली के मौजूदा मेट्रो नेटवर्क के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम कर सकती है।
अंडरग्राउंड सफर में मोबाइल नेटवर्क की नहीं होगी परेशानी
गोल्डन लाइन के भूमिगत हिस्से में यात्रियों के मोबाइल नेटवर्क को लेकर भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं। DMRC की योजना के तहत 11 भूमिगत स्टेशनों और टनल वाले हिस्सों में साझा मोबाइल नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।
इसका मकसद यात्रियों को टनल और भूमिगत स्टेशनों के भीतर भी मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। योजना के तहत 2G, 3G, 4G और 5G जैसी मोबाइल सेवाओं को सपोर्ट किया जाएगा।
नेटवर्क की उपलब्धता को 99.95 फीसदी से ज्यादा रखने का लक्ष्य रखा गया है। साझा इंफ्रास्ट्रक्चर होने की वजह से अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों को एक ही जगह पर अपना अलग नेटवर्क सिस्टम तैयार करने की जरूरत भी कम होगी।
टनल में पुलिस का वायरलेस नेटवर्क भी रहेगा एक्टिव
भूमिगत हिस्सों में सिर्फ आम यात्रियों के मोबाइल नेटवर्क पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस की वायरलेस कम्युनिकेशन सेवा को भी इस नेटवर्क सिस्टम से जोड़ने की योजना है।
इसके लिए अतिरिक्त पोर्ट उपलब्ध कराया जाएगा। 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में पुलिस वायरलेस सेवा को जोड़ने से टनल और भूमिगत स्टेशनों के भीतर भी सुरक्षा एजेंसियों के बीच संपर्क बनाए रखने में मदद मिलेगी।
भूमिगत मेट्रो नेटवर्क में ऐसी कनेक्टिविटी आपात स्थिति के दौरान काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे सुरक्षा और ऑपरेशनल कम्युनिकेशन को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
एयरपोर्ट जाने वालों को भी होगा बड़ा फायदा
गोल्डन लाइन का दिल्ली एयरोसिटी से जुड़ना इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे अहम विशेषताओं में से एक है। एयरोसिटी राजधानी के प्रमुख कारोबारी और होटल क्षेत्र के साथ-साथ एयरपोर्ट कनेक्टिविटी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
गोल्डन लाइन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के बीच इंटरचेंज बनने के बाद दक्षिण दिल्ली के कई हिस्सों से आने वाले यात्रियों के लिए एयरपोर्ट तक पहुंचना आसान हो सकता है।
महिपालपुर, वसंत कुंज और आसपास के इलाकों में रहने या काम करने वाले लोगों को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। उन्हें एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त यात्रा करने की जरूरत कम पड़ सकती है।
आगे भी बढ़ेगा गोल्डन लाइन का नेटवर्क
गोल्डन लाइन का विकास सिर्फ एयरोसिटी से तुगलकाबाद तक सीमित नहीं रहने वाला है। इसके आगे विस्तार की भी योजना बनाई गई है।
फेज-5ए के तहत तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज और एयरोसिटी से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 तक विस्तार को मंजूरी दी गई है।
इन विस्तार परियोजनाओं को पूरा होने के बाद गोल्डन लाइन का नेटवर्क और व्यापक हो जाएगा। इससे दक्षिण दिल्ली के अलावा एयरपोर्ट और आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने वाले यात्रियों को भी अतिरिक्त कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
दक्षिण दिल्ली के लिए क्यों अहम है गोल्डन लाइन?
दक्षिण दिल्ली में कई बड़े रिहायशी इलाके, शैक्षणिक संस्थान, कारोबारी क्षेत्र और एयरपोर्ट से जुड़े महत्वपूर्ण इलाके मौजूद हैं। ऐसे में नई मेट्रो लाइन से यहां की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
गोल्डन लाइन शुरू होने के बाद यात्रियों को कई जगहों पर सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा। इसके अलावा मौजूदा मेट्रो लाइनों पर यात्रियों का दबाव कम करने और अलग-अलग कॉरिडोर के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने में भी यह लाइन अहम भूमिका निभा सकती है।
कुल मिलाकर, दिल्ली एयरोसिटी से तुगलकाबाद के बीच गोल्डन लाइन के शुरू होने का इंतजार कर रहे दक्षिण दिल्ली के लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। 15 स्टेशनों वाला यह कॉरिडोर न सिर्फ नए इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगा, बल्कि एयरपोर्ट एक्सप्रेस, येलो लाइन और वॉयलेट लाइन जैसी मौजूदा कनेक्टिविटी से जुड़कर दिल्ली में सफर को और आसान बना सकता है।


