India-US Investment: भारतीय कंपनियों का अमेरिका में निवेश लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक, भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 24 अरब डॉलर का नया निवेश किया है। खास बात यह है कि अमेरिका के अलग-अलग दूतावासों के बीच नए निवेश को आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा में नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास पहले स्थान पर रहा।
वहीं, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय उद्योग जगत से घरेलू बाजार से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर विनिर्माण और कारोबार का विस्तार करने की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से ऑटो कंपोनेंट कंपनियों से दुनिया के लिए उत्पादन करने और विकसित देशों में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी मजबूत करने का आह्वान किया।
भारतीय उद्योगों को ग्लोबल होने की सलाह
उद्योग संगठन एक्मा (ACMA) के वार्षिक सत्र में पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय उद्योग के लिए अब सिर्फ घरेलू बाजार पर निर्भर रहने का समय नहीं है। भारतीय कंपनियों को दुनिया के अलग-अलग बाजारों में अपनी उत्पादन क्षमता और कारोबारी मौजूदगी बढ़ानी चाहिए।
गोयल ने भारतीय उद्योगों से वैश्विक स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने और विकसित देशों में अपना मजबूत फुटप्रिंट बनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अब भारतीय कंपनियों को देश से बाहर निकलकर वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने का समय आ गया है। इससे भारतीय उद्योगों को नए बाजार मिलने के साथ-साथ वैश्विक सप्लाई चेन में भी अपनी भूमिका मजबूत करने का मौका मिलेगा।
ऑटो कंपोनेंट सेक्टर के लिए विशेष पार्क का प्रस्ताव
वाणिज्य मंत्री ने ऑटो कंपोनेंट उद्योग के विकास को लेकर भी अहम सुझाव दिया। उन्होंने देश के कुछ क्षेत्रों में ऑटो कंपोनेंट कंपनियों के लिए विशेष पार्क विकसित करने का प्रस्ताव रखा।
ऐसे पार्कों से कंपनियों को एक जगह पर उत्पादन, सप्लाई चेन और अन्य औद्योगिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। सरकार का जोर भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर है।
अमेरिका में भारतीय कंपनियों का 24 अरब डॉलर का नया निवेश
एक्मा के कार्यक्रम में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारतीय कंपनियों के अमेरिका में निवेश को लेकर बड़ा खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनियों की ओर से अमेरिका में 24 अरब डॉलर का नया निवेश आया है। यह आंकड़ा अमेरिका में भारतीय कंपनियों की बढ़ती कारोबारी मौजूदगी को दर्शाता है।
हालांकि, इस आंकड़े का यह मतलब नहीं है कि अमेरिका में विदेशी निवेश करने वाले देशों में भारत सबसे ऊपर है। अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में निवेश के मामले में जापान और जर्मनी जैसे देश भी प्रमुख स्थान रखते हैं। भारतीय कंपनियां भी अमेरिका में बड़े निवेशकों में शामिल हैं।
अमेरिकी दूतावासों की रेस में दिल्ली नंबर-1
सर्जियो गोर के मुताबिक, दुनिया भर में मौजूद अमेरिकी दूतावासों के बीच अमेरिका में नया निवेश आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा होती है। इस प्रतिस्पर्धा में भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने पहला स्थान हासिल किया।
उन्होंने भारतीय कंपनियों की अमेरिका में निवेश रुचि को दोनों देशों के मजबूत कारोबारी संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास की सफलता से यह भी संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका के बीच निवेश और कारोबारी सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी होगी चर्चा
अमेरिकी राजदूत ने यह भी जानकारी दी कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल महीने के अंत में अमेरिका की यात्रा करेंगे। इस दौरान जी-20 से जुड़ी बातचीत और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर चर्चा होने की उम्मीद है।
सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों सरकारें मिलकर ऐसा व्यापारिक संबंध बनाने की दिशा में काम कर रही हैं, जो निष्पक्ष, पारस्परिक और दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो।
क्यों अहम है भारतीय कंपनियों का अमेरिका में बढ़ता निवेश?
अमेरिका भारतीय कंपनियों के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक है। भारतीय कंपनियां आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य क्षेत्रों में अमेरिका में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।
अमेरिका में निवेश से भारतीय कंपनियों को बड़े उपभोक्ता बाजार तक पहुंच बनाने के अलावा स्थानीय स्तर पर उत्पादन और सप्लाई चेन विकसित करने का अवसर मिलता है। वहीं, अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को भी मजबूत करती है।
पीयूष गोयल का वैश्विक विनिर्माण पर जोर और अमेरिका में भारतीय कंपनियों का 24 अरब डॉलर का नया निवेश इस बात का संकेत है कि भारतीय उद्योग अब घरेलू बाजार के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


