देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब इसका असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहने वाला है। आने वाले दिनों में आम आदमी की रसोई से लेकर यात्रा, खेती, ऑनलाइन डिलीवरी और रोजमर्रा की जरूरतों तक लगभग हर क्षेत्र पर इसका असर दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने के बाद देश में महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है क्योंकि भारत का बड़ा ट्रांसपोर्ट नेटवर्क डीजल और पेट्रोल पर आधारित है।
हालिया बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड में करीब 50% तक तेजी के बाद सरकारी तेल कंपनियों पर भारी दबाव बढ़ गया था। उद्योग सूत्रों के अनुसार तेल कंपनियां लंबे समय से नुकसान झेल रही थीं और आखिरकार कीमत बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा।
क्यों इतना महत्वपूर्ण है डीजल?
भारत की सप्लाई चेन का सबसे बड़ा आधार डीजल है। देश में चलने वाले अधिकांश ट्रक, कंटेनर, बसें, ट्रैक्टर, कमर्शियल वाहन और जेनरेटर डीजल पर निर्भर हैं। गांव से शहर तक सब्जी, फल, दूध, अनाज, दवा और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने का पूरा नेटवर्क इसी ईंधन पर चलता है।
यही कारण है कि जब डीजल महंगा होता है तो उसका असर सीधे ट्रांसपोर्ट लागत पर पड़ता है। कंपनियां बढ़ी हुई लागत को लंबे समय तक खुद नहीं झेल पातीं और आखिरकार उसका बोझ ग्राहकों पर डाल दिया जाता है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि को महंगाई बढ़ने का शुरुआती संकेत माना जाता है।
सबसे पहले किचन पर पड़ेगा असर
ईंधन महंगा होने का सबसे बड़ा असर घर के किचन बजट पर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले हफ्तों में इन चीजों की कीमतों में तेजी आ सकती है:
- टमाटर, प्याज और हरी सब्जियां
- दूध, दही और पनीर
- फल और पैकेज्ड फूड
- खाद्य तेल और अनाज
- फ्रोजन और डेयरी उत्पाद
दरअसल जल्दी खराब होने वाले सामान को कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेटेड ट्रकों के जरिए पहुंचाया जाता है। इन वाहनों में सामान्य ट्रांसपोर्ट की तुलना में ज्यादा ईंधन खर्च होता है। ऐसे में डीजल महंगा होने का असर सीधे खाने-पीने की वस्तुओं पर पड़ता है।
ग्रोसरी और ऑनलाइन डिलीवरी भी हो सकती है महंगी
आज बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन ग्रोसरी और फूड डिलीवरी ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। ये कंपनियां लाखों बाइक और डिलीवरी वाहनों के जरिए सामान पहुंचाती हैं। पेट्रोल महंगा होने के बाद उनकी ऑपरेटिंग लागत बढ़ेगी।
ऐसे में आने वाले समय में डिलीवरी चार्ज बढ़ सकता है, Surge fee ज्यादा लग सकती है, Minimum order value बढ़ सकती है, फूड ऐप्स पैकिंग या प्लेटफॉर्म फीस बढ़ा सकती हैं विशेषज्ञ मानते हैं कि ई-कॉमर्स कंपनियां शुरुआत में खुद लागत झेल सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा संभव नहीं होगा।
कैब और बाइक राइड का किराया भी बढ़ सकता है
अगर आप रोजाना ऑफिस आने-जाने के लिए कैब या बाइक टैक्सी का इस्तेमाल करते हैं तो आपकी जेब पर भी असर पड़ सकता है। Ola, Uber और Rapido जैसे प्लेटफॉर्म्स पहले भी ईंधन कीमत बढ़ने पर किराया बढ़ा चुके हैं।
पेट्रोल महंगा होने के बाद Base fare बढ़ सकता है, Peak pricing ज्यादा हो सकती है, प्रति किलोमीटर चार्ज बढ़ सकता है, बाइक टैक्सी महंगी हो सकती है बड़ी संख्या में ड्राइवर पहले से ही बढ़ती लागत की शिकायत कर रहे हैं। ऐसे में किराया संशोधन की मांग तेज हो सकती है।
बस और ट्रांसपोर्ट किराए में भी आ सकती है तेजी
डीजल की कीमत बढ़ने का असर सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ता है। राज्य परिवहन निगम और निजी बस ऑपरेटर्स की लागत बढ़ने के बाद किराया बढ़ाने की मांग शुरू हो सकती है।
इसके अलावा स्कूल बस फीस बढ़ सकती है, ट्रांसपोर्ट कंपनियां माल भाड़ा बढ़ा सकती हैं, लॉजिस्टिक्स महंगा हो सकता है, छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है इसका असर अंततः बाजार में बिकने वाले लगभग हर उत्पाद की कीमत पर दिखाई देता है।
किसानों पर भी बढ़ेगा बोझ
भारत में खेती का बड़ा हिस्सा डीजल पर आधारित है। ट्रैक्टर, सिंचाई पंप, हार्वेस्टर और कृषि मशीनों में डीजल का व्यापक इस्तेमाल होता है। ऐसे में डीजल महंगा होने का सीधा असर खेती की लागत पर पड़ता है।
किसानों के लिए जुताई महंगी होगी, सिंचाई खर्च बढ़ेगा, फसल ढुलाई लागत बढ़ेगी, मंडी तक पहुंचाने का खर्च बढ़ेगा यदि खेती की लागत बढ़ती है तो आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई और तेज हो सकती है।
फ्लाइट टिकट और यात्रा भी हो सकती है महंगी
हालांकि विमान ATF (Aviation Turbine Fuel) पर चलते हैं, लेकिन कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर एविएशन सेक्टर पर भी पड़ता है। एयरलाइंस कंपनियां ईंधन लागत बढ़ने पर टिकट महंगे कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू फ्लाइट किराए बढ़ सकते हैं, लॉन्ग रूट टिकट महंगे हो सकते हैं, टूर पैकेज की कीमत बढ़ सकती है यानी छुट्टियों और बिजनेस ट्रैवल का खर्च भी बढ़ने की आशंका है।
सरकार ने देर से क्यों बढ़ाए दाम?
सरकार और तेल कंपनियां लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन कच्चे तेल में तेज उछाल के बाद तेल कंपनियों का नुकसान लगातार बढ़ रहा था।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार:
- कंपनियों को हर महीने हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था
- अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां बाजार आधारित कीमतों की सलाह दे रही थीं
- लंबे समय तक घाटा झेलना संभव नहीं था
इसी वजह से आखिरकार कीमत बढ़ाने का फैसला लिया गया।
क्या आने वाले समय में और बढ़ सकती हैं कीमतें?
विशेषज्ञों का कहना है कि आगे का रुख काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा। अगर पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है और ब्रेंट क्रूड ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं।
इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी, आयात लागत में वृद्धि, शिपिंग खर्च बढ़ना भी घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बना सकते हैं।
आम आदमी के लिए सबसे बड़ी चिंता क्या?
पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने का असर केवल वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। इसकी वजह से पूरी अर्थव्यवस्था की लागत बढ़ती है। यही कारण है कि महंगाई का असर हर वर्ग पर दिखाई देता है।
आने वाले समय में आम आदमी को महंगी सब्जियां, बढ़ा हुआ किराया, ज्यादा डिलीवरी चार्ज, महंगी यात्रा, बढ़ा हुआ घरेलू बजट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
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