दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल), 13 अप्रैल: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने सोमवार को मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह मामला “हिंदू-मुस्लिम का नहीं” है, बल्कि अब वे न्यायपालिका पर भी आरोप लगा रही हैं।
दुर्गापुर में रोड शो के दौरान मीडिया से बातचीत में अमित शाह ने कहा कि SIR की पूरी प्रक्रिया न्यायिक निगरानी में हो रही है, ऐसे में उस पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वे चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को समझ सकते हैं, लेकिन अब न्यायपालिका को निशाना बनाना गंभीर मुद्दा है।
SIR विवाद क्या है और क्यों बना बड़ा मुद्दा?
पश्चिम बंगाल में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) के तहत मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना है।
हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आरोप है कि SIR के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे चुनावी परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
Mamata Banerjee के आरोप
मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने SIR प्रक्रिया को “घोटाला” बताते हुए आरोप लगाया कि यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता में लाने की साजिश है।
उन्होंने दावा किया कि लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिसमें कुछ समुदायों—जैसे मतुआ समाज—के लोग भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी उन सभी लोगों के साथ खड़ी रहेगी, जिनके नाम मतदाता सूची से गायब हुए हैं।
Amit Shah का जवाब
इन आरोपों का जवाब देते हुए Amit Shah ने कहा कि SIR पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया के तहत हो रहा है, इसलिए इसे राजनीतिक रंग देना गलत है।
उन्होंने यह भी कहा कि TMC द्वारा इस मुद्दे को “हिंदू-मुस्लिम” रंग देने की कोशिश की जा रही है, जबकि यह प्रशासनिक प्रक्रिया है। शाह ने जोर देकर कहा कि यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम है।
चुनावी बयानबाज़ी और राजनीतिक रणनीति
इस पूरे विवाद को चुनावी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए दोनों प्रमुख दल—BJP और TMC—एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।
अमित शाह ने अपने बयान में विश्वास जताया कि इस बार राज्य में सत्ता परिवर्तन होगा और BJP सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि 5 मई को राज्य में BJP के मुख्यमंत्री शपथ लेंगे।
“Sonar Bangla” बनाम “Syndicate Raj” का नैरेटिव
अमित शाह ने Mamata Banerjee सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने “सोनार बांग्ला” को “सिंडिकेट राज” में बदल दिया है।
उन्होंने कहा कि BJP राज्य में विकास, उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर काम करेगी। साथ ही उन्होंने Rabindranath Tagore के “सोनार बांग्ला” के विजन का भी जिक्र किया।
सीमा सुरक्षा और घुसपैठ का मुद्दा
अमित शाह ने सीमा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने बॉर्डर फेंसिंग के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध नहीं कराई है।
उनके अनुसार, सीमा सुरक्षा बल (BSF) को फेंसिंग के लिए 600 एकड़ जमीन की जरूरत है, लेकिन राज्य सरकार के सहयोग न करने से घुसपैठ की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि BJP सरकार बनने पर इस मुद्दे का समाधान किया जाएगा।
आर्थिक और रोजगार के मुद्दे
शाह ने यह भी आरोप लगाया कि TMC शासन के दौरान राज्य से कई उद्योग बाहर चले गए हैं, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर कम हुए हैं।
उन्होंने कहा कि एक समय में औद्योगिक केंद्र रहा पश्चिम बंगाल अब रोजगार संकट से जूझ रहा है, और BJP इस स्थिति को बदलने के लिए काम करेगी।
विपक्ष का नजरिया
TMC का कहना है कि BJP SIR और घुसपैठ जैसे मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। पार्टी का आरोप है कि इन मुद्दों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
इस तरह दोनों पक्ष अपने-अपने दृष्टिकोण से इस मुद्दे को जनता के सामने रख रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल और गर्म हो गया है।
चुनावी परिदृश्य
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में होने हैं—23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 4 मई को मतगणना होगी।
पिछले चुनाव (2021) में TMC ने 213 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि BJP को 77 सीटें मिली थीं। इस बार दोनों दल जीत का दावा कर रहे हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प बन गया है।
आम मतदाताओं के लिए क्या मायने?
SIR जैसे मुद्दे सीधे तौर पर मतदाताओं को प्रभावित करते हैं। यदि किसी का नाम मतदाता सूची से हटता है, तो वह मतदान नहीं कर सकता, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इसलिए यह जरूरी है कि:
- मतदाता अपने नाम की जांच करें
- किसी भी त्रुटि की शिकायत करें
- आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लें
निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर विवाद केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह अब एक बड़ा राजनीतिक और चुनावी मुद्दा बन चुका है। Amit Shah और Mamata Banerjee के बीच बयानबाज़ी ने इसे और तेज कर दिया है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और इसका चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ता है।
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