देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी को लेकर शुरू हुआ डिजिटल ऑथेंटिकेशन विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। ईरान-इजरायल तनाव के बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंताओं के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू LPG सिलेंडर की डिलीवरी में 100% डिजिटल ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू कर दिया था। लेकिन अब इस व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर ग्रामीण और कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों में।
इसी मामले में Bombay High Court की नागपुर बेंच ने केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों से ऑफलाइन LPG बुकिंग और डिलीवरी व्यवस्था जारी रखने की मांग पर विचार करने को कहा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि डिजिटल सिस्टम जारी रखा जा सकता है, लेकिन कुछ उपभोक्ताओं को इससे छूट देने पर विचार होना चाहिए।
यह मामला केवल OTP या तकनीकी बदलाव का नहीं है, बल्कि करोड़ों घरेलू उपभोक्ताओं, गैस एजेंसियों और ग्रामीण भारत की डिजिटल पहुंच से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
आखिर क्या है पूरा विवाद?
सरकारी तेल कंपनियों ने हाल के महीनों में घरेलू LPG सिलेंडर डिलीवरी के लिए DAC यानी Delivery Authentication Code सिस्टम लागू किया।
इस व्यवस्था के तहत:
- ग्राहक के मोबाइल पर OTP या DAC भेजा जाता है
- सिलेंडर डिलीवरी तभी पूरी मानी जाती है जब ग्राहक कोड बताए
- बिना डिजिटल प्रमाणीकरण डिलीवरी दर्ज नहीं की जाती
सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि इससे:
- फर्जी डिलीवरी रुकेगी
- सब्सिडी लीकेज कम होगा
- सिस्टम पारदर्शी बनेगा
- गैस चोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगेगी
लेकिन दूसरी तरफ LPG वितरकों और ग्रामीण ग्राहकों का कहना है कि जमीन पर यह व्यवस्था कई जगह परेशानी पैदा कर रही है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा?
नागपुर बेंच ने केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को निर्देश दिया कि वे ऑफलाइन LPG बुकिंग और डिलीवरी सिस्टम जारी रखने से जुड़े प्रतिनिधित्व (representation) पर विचार करें।
अदालत ने साफ कहा कि:
- डिजिटल ऑथेंटिकेशन जारी रखा जा सकता है
- लेकिन कुछ श्रेणी के उपभोक्ताओं को राहत देने पर विचार होना चाहिए
कोर्ट ने तेल कंपनियों को तीन सप्ताह के भीतर इस प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने को कहा है।
हालांकि अदालत ने फिलहाल DAC सिस्टम को रद्द नहीं किया है।
किसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया?
यह याचिका LPG Distributors Association (India) के अध्यक्ष Jaiprakash Tiwari द्वारा दायर की गई थी।
याचिका में कहा गया कि:
- ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या गंभीर है
- तकनीकी गड़बड़ियों से OTP नहीं पहुंचता
- वेबसाइट और सर्वर फेल हो जाते हैं
- इससे ग्राहकों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पाता
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की कि DAC आधारित 100% अनिवार्य प्रणाली पर दोबारा विचार किया जाए।
अचानक क्यों बढ़ाया गया डिजिटल सिस्टम?
सुनवाई के दौरान बताया गया कि शुरुआत में तेल कंपनियों ने केवल 50% डिलीवरी के लिए DAC सिस्टम लागू किया था।
बाद में इसे:
- पहले 95%
- और फिर 100%
तक अनिवार्य कर दिया गया।
4 अप्रैल 2026 को वितरकों को व्हाट्सएप के जरिए संदेश भेजकर कहा गया कि:
बिना DAC ऑथेंटिकेशन सिलेंडर डिलीवर करने पर कार्रवाई हो सकती है।
यही कदम विवाद का बड़ा कारण बना।
ग्रामीण इलाकों में क्या हैं सबसे बड़ी दिक्कतें?
भारत में अभी भी बड़ी आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां:
- मोबाइल नेटवर्क कमजोर है
- इंटरनेट अस्थिर है
- स्मार्टफोन की पहुंच सीमित है
- बुजुर्ग ग्राहक डिजिटल सिस्टम समझ नहीं पाते
ऐसे में OTP आधारित LPG डिलीवरी कई जगह व्यावहारिक चुनौती बन रही है।
विशेष रूप से:
- बुजुर्ग उपभोक्ता
- दूरदराज गांव
- कम डिजिटल साक्षरता वाले ग्राहक
सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं।
क्या सरकार OTP सिस्टम पूरी तरह हटा सकती है?
फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि सरकार पूरी तरह डिजिटल ऑथेंटिकेशन हटाने जा रही है।
दरअसल सरकार पिछले कुछ वर्षों से:
- DBT,
- डिजिटल सब्सिडी,
- Aadhaar-linked verification,
- और ऑनलाइन ट्रैकिंग
जैसी व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत कर रही है।
ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार डिजिटल सिस्टम को वापस लेने के बजाय:
- Hybrid Model
- Offline exemption
- Alternative verification methods
जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है।
तेल कंपनियां इस सिस्टम को क्यों जरूरी मानती हैं?
सरकारी तेल कंपनियों का तर्क है कि DAC सिस्टम से:
- फर्जी एंट्री कम होती हैं
- डिलीवरी पारदर्शी बनती है
- सिलेंडर डायवर्जन रुकता है
- उपभोक्ता शिकायतें कम होती हैं
इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के दौर में सरकार LPG सप्लाई सिस्टम को ज्यादा नियंत्रित और मॉनिटर करना चाहती है।
ईरान-इजरायल तनाव का क्या संबंध है?
ईरान-इजरायल संघर्ष शुरू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी थी।
इसके कारण:
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- LPG सप्लाई को लेकर चिंता
- गैस लॉजिस्टिक्स पर दबाव
देखने को मिला।
हालांकि भारत में बड़े पैमाने पर LPG संकट नहीं आया, लेकिन सरकार और तेल कंपनियों ने निगरानी और वितरण व्यवस्था को ज्यादा सख्त करना शुरू कर दिया।
क्या इससे आम ग्राहकों पर असर पड़ेगा?
यदि DAC सिस्टम 100% अनिवार्य बना रहता है, तो:
- ग्रामीण ग्राहकों को परेशानी जारी रह सकती है
- डिलीवरी में देरी बढ़ सकती है
- OTP न मिलने पर सिलेंडर अटक सकता है
वहीं अगर सरकार कुछ छूट देती है, तो:
- ऑफलाइन डिलीवरी विकल्प जारी रह सकते हैं
- बुजुर्ग और ग्रामीण ग्राहकों को राहत मिल सकती है
यानी आने वाले हफ्तों में तेल कंपनियों का फैसला करोड़ों LPG उपभोक्ताओं को प्रभावित कर सकता है।
Why It Matters
भारत दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ता देशों में शामिल है। उज्ज्वला योजना और सब्सिडी आधारित वितरण मॉडल के बाद घरेलू गैस सिलेंडर करोड़ों परिवारों की जरूरत बन चुका है।
ऐसे में डिजिटल ऑथेंटिकेशन और OTP आधारित डिलीवरी केवल तकनीकी बदलाव नहीं है। यह सवाल भी है कि:
- क्या भारत का ग्रामीण ढांचा पूरी तरह डिजिटल सिस्टम के लिए तैयार है?
- क्या तकनीकी पारदर्शिता और जमीनी सुविधा के बीच संतुलन बन पाया है?
- और क्या डिजिटल सुधारों में कमजोर वर्गों को पर्याप्त राहत मिल रही है?
यही वजह है कि बॉम्बे हाई कोर्ट की यह टिप्पणी केवल LPG डिलीवरी तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि डिजिटल गवर्नेंस बनाम जमीनी वास्तविकता की बड़ी बहस का हिस्सा बनती जा रही है।
FAQ
DAC सिस्टम क्या है?
DAC यानी Delivery Authentication Code एक OTP आधारित सिस्टम है जिसके जरिए LPG सिलेंडर डिलीवरी को डिजिटल रूप से सत्यापित किया जाता है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने सरकार और तेल कंपनियों से ऑफलाइन LPG डिलीवरी व्यवस्था जारी रखने की मांग पर विचार करने को कहा है।
क्या OTP सिस्टम पूरी तरह हट जाएगा?
फिलहाल ऐसा कोई आदेश नहीं आया है। सरकार कुछ श्रेणियों को छूट देने पर विचार कर सकती है।
सबसे ज्यादा परेशानी किन लोगों को हो रही है?
ग्रामीण क्षेत्रों, कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों और बुजुर्ग ग्राहकों को सबसे ज्यादा दिक्कतें बताई जा रही हैं।
तेल कंपनियां DAC सिस्टम क्यों लागू कर रही हैं?
कंपनियों का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ती है और फर्जी डिलीवरी व गैस डायवर्जन पर रोक लगती है।
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