आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) दुनिया भर में बड़े स्तर पर छंटनी की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी 12 हजार से 15 हजार कर्मचारियों को बाहर कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह इस साल टेक सेक्टर की सबसे बड़ी छंटनियों में से एक होगी। सबसे ज्यादा असर भारत में देखने को मिल सकता है क्योंकि कंपनी का सबसे बड़ा वर्कफोर्स यहीं मौजूद है।
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, कॉग्निजेंट अपने बिजनेस मॉडल और वर्कफोर्स स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव कर रही है। कंपनी अब पुराने स्टाफिंग मॉडल से हटकर कम कर्मचारियों और ज्यादा डिजिटल टेक्नोलॉजी वाले मॉडल पर फोकस करना चाहती है।
भारत में सबसे ज्यादा कर्मचारियों पर असर क्यों?
कॉग्निजेंट के कुल 3.57 लाख कर्मचारियों में से लगभग 2.50 लाख कर्मचारी भारत में काम करते हैं। कंपनी के प्रमुख ऑफिस:
- बेंगलुरु
- चेन्नई
- हैदराबाद
- पुणे
जैसे बड़े आईटी शहरों में हैं। इसी वजह से माना जा रहा है कि अगर छंटनी होती है तो भारत में सबसे ज्यादा कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
कितनी नौकरियां जा सकती हैं?
हालांकि कंपनी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई संख्या जारी नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि:
- 12,000 से 15,000 कर्मचारियों तक की नौकरी जा सकती है।
- इनमें सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय कर्मचारियों का हो सकता है।
यह छंटनी कंपनी के “Project Leap” restructuring plan के तहत की जा रही है।
कर्मचारियों को मिलेगा सेवरेंस पैकेज
कॉग्निजेंट ने अपने तिमाही नतीजों के दौरान बताया कि वह कर्मचारियों को हटाने में आने वाले खर्च यानी severance cost पर:
- 230 मिलियन डॉलर से 320 मिलियन डॉलर
तक खर्च कर सकती है। सेवरेंस पैकेज वह आर्थिक सहायता होती है जो किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाले जाने पर दी जाती है।
भारत में औसत सैलरी के आधार पर बड़ा अनुमान
भारत में कॉग्निजेंट कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी लगभग ₹15 लाख बताई जा रही है। अगर कंपनी कर्मचारियों को:
- 6 महीने की सैलरी के बराबर severance pay
देती है, तो:
- प्रति कर्मचारी लगभग ₹7.5 लाख मिल सकते हैं।
इस हिसाब से कंपनी का तय बजट भारत में लगभग 12 से 13 हजार कर्मचारियों की छंटनी को कवर कर सकता है।
आखिर क्यों हो रही है इतनी बड़ी छंटनी?
आईटी इंडस्ट्री में तेजी से बदलाव हो रहा है। पहले कंपनियां बड़ी संख्या में freshers hire करके उन्हें ट्रेन करती थीं। लेकिन अब क्लाइंट्स:
- कम लागत चाहते हैं
- automation और AI tools पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं
- बड़े fresher batches की training cost उठाना नहीं चाहते
इसी वजह से कंपनियां अपने workforce model को बदल रही हैं।
CEO रवि कुमार एस ने क्या कहा?
कॉग्निजेंट के CEO Ravi Kumar S ने earnings call के दौरान कहा कि कंपनी अब:
“छोटे लेकिन ज्यादा प्रभावी workforce pyramid”
की ओर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में:
- Digital labor
- Human labor
दोनों का मिश्रण इस्तेमाल किया जाएगा। यानी AI और automation का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा।
IT सेक्टर के लिए बड़ा संकेत
पिछले कुछ महीनों में:
- Amazon
- Oracle
- Microsoft
जैसी बड़ी टेक कंपनियां भी layoffs कर चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि:
- Entry-level jobs पर दबाव बढ़ सकता है
- AI traditional IT roles को बदल रहा है
- कंपनियां अब कम लोगों से ज्यादा काम लेना चाहती हैं
फ्रेशर्स के लिए क्या संकेत?
आईटी सेक्टर में नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए यह बड़ा संकेत माना जा रहा है। अब कंपनियां केवल basic coding नहीं, बल्कि:
- AI skills
- Cloud computing
- Data analytics
- Automation tools
जैसी advanced skills पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।
निष्कर्ष
कॉग्निजेंट की संभावित छंटनी यह दिखाती है कि ग्लोबल आईटी इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है। कंपनियां अब AI और automation की मदद से workforce को छोटा लेकिन ज्यादा efficient बनाने की कोशिश कर रही हैं। भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा आईटी टैलेंट हब है, इस बदलाव का सबसे बड़ा असर झेल सकता है।
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