वंदे भारत एक्सप्रेस को भारतीय रेलवे की सबसे प्रीमियम और हाई-स्पीड ट्रेनों में गिना जाता है। इसकी पहचान सिर्फ तेज रफ्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर सुविधा, साफ-सुथरी सर्विस और आधुनिक यात्रा अनुभव को लेकर भी यह चर्चा में रहती है। लेकिन पिछले कुछ समय से इस ट्रेन की “प्रीमियम इमेज” पर बार-बार सवाल उठ रहे हैं।
ताजा मामला आगरा से वाराणसी जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 20176) का है, जहां एक यात्री ने परोसे गए नाश्ते में कीड़ा मिलने का गंभीर आरोप लगाया है। यह घटना सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेजी से वायरल हो गई और एक बार फिर रेलवे की फूड सर्विस सिस्टम पर बहस छिड़ गई है।
यात्री ने वीडियो शेयर कर जताई नाराजगी
आज आगरा से वाराणसी जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 20176) में बेहद ही खराब अनुभव रहा। कोच C13 में परोसे गए नाश्ते में कीड़ा मिला @IRCTCofficial @RailMinIndia @VandeBharatExp महोदय कृपया कार्यवाही सुनिचित करें। क्रमशः pic.twitter.com/zXMbGxXOVK
— Journalist Mayank (@Journalistp4ub) May 1, 2026 इस घटना में सफर कर रहे यात्री ट्रेन के कोच C13 में यात्रा कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जो नाश्ता परोसा गया उसमें एक छोटा कीड़ा मिला, जिसे देखकर वे हैरान रह गए।
यात्री ने इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर शेयर किया। वीडियो में वह नाराजगी जताते हुए यह सवाल करते नजर आते हैं कि क्या यही वह “प्रीमियम सर्विस” है, जिसके लिए यात्री अधिक किराया देते हैं।
उनका कहना था कि यह सिर्फ एक लापरवाही नहीं बल्कि यात्रियों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्रेन में हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
सोशल मीडिया पर बढ़ा मामला, रेलवे पर दबाव
वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला सिर्फ एक ट्रेन तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर यात्रियों ने भारतीय रेलवे और IRCTC की फूड क्वालिटी को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
कई यूजर्स ने लिखा कि वंदे भारत जैसी हाई-प्रोफाइल ट्रेनों में इस तरह की घटनाएं सिस्टम की खामियों को उजागर करती हैं। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि यह सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों से ऐसे मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहला मौका नहीं है जब वंदे भारत एक्सप्रेस में खाने को लेकर शिकायत सामने आई हो। पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग रूट्स पर कई यात्रियों ने इसी तरह की समस्याएं रिपोर्ट की हैं।
पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस में भी यात्रियों ने खाने की गुणवत्ता और हाइजीन को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उस मामले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
इसी तरह अहमदाबाद-मुंबई रूट पर भी एक यात्री ने खाने में जिंदा कीड़ा मिलने का दावा किया था। एक अन्य घटना में रानी कमलापति-नई दिल्ली वंदे भारत में कॉकरोच मिलने की शिकायत सामने आई थी।
इन घटनाओं ने रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था पर लगातार सवाल खड़े किए हैं।
रेलवे की कार्रवाई और जुर्माने का इतिहास
रेलवे ने पहले के मामलों में सख्त कदम भी उठाए हैं। कई घटनाओं के बाद IRCTC पर भारी जुर्माना लगाया गया था। कुछ मामलों में संबंधित वेंडर पर 10 लाख रुपये तक की पेनल्टी और किचन को सील करने जैसी कार्रवाई भी की गई।
पटना-टाटानगर मामले में तो रेलवे ने वेंडर पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया था और कॉन्ट्रैक्ट तक समाप्त कर दिया गया था।
इसके बावजूद बार-बार सामने आ रही शिकायतें यह संकेत देती हैं कि समस्या सिर्फ कार्रवाई से नहीं, बल्कि सिस्टम लेवल पर सुधार की मांग कर रही है।
वंदे भारत की इमेज पर असर क्यों पड़ रहा है?
वंदे भारत एक्सप्रेस को भारत की मॉडर्न रेलवे क्रांति का प्रतीक माना जाता है। तेज रफ्तार, समय की बचत और प्रीमियम अनुभव इसकी पहचान हैं। लेकिन भोजन से जुड़ी लगातार शिकायतें इस ब्रांड वैल्यू को प्रभावित कर रही हैं।
यात्रियों के लिए ट्रेन का अनुभव सिर्फ सीट या स्पीड तक सीमित नहीं होता, बल्कि भोजन और स्वच्छता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यही वजह है कि इस तरह की घटनाएं सीधे तौर पर भरोसे को प्रभावित करती हैं।
क्या सिस्टम में गहरी समस्या है?
रेलवे कैटरिंग सिस्टम में कई स्तरों पर जिम्मेदारी बंटी हुई है—IRCTC, प्राइवेट वेंडर और लोकल किचन यूनिट्स। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी बिखरे हुए सिस्टम के कारण गुणवत्ता नियंत्रण मुश्किल हो जाता है।
फूड सप्लाई चेन में यदि किसी भी स्तर पर निगरानी कमजोर होती है, तो उसका सीधा असर यात्रियों तक पहुंचता है।
यात्रियों का भरोसा सबसे बड़ी चुनौती
वंदे भारत जैसी ट्रेनें भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का भविष्य मानी जाती हैं। लेकिन यात्रियों का भरोसा बनाए रखना किसी भी तकनीक या स्पीड से ज्यादा जरूरी है।
सोशल मीडिया के दौर में एक छोटी सी घटना भी मिनटों में वायरल होकर बड़े सवाल खड़े कर देती है। यही कारण है कि अब रेलवे के लिए सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि सर्विस क्वालिटी भी उतनी ही बड़ी प्राथमिकता बन गई है।
निष्कर्ष: सुधार की जरूरत अब टालने योग्य नहीं
वंदे भारत एक्सप्रेस में बार-बार सामने आ रही फूड क्वालिटी से जुड़ी घटनाएं यह दिखाती हैं कि सिस्टम में केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधार की जरूरत है।
यात्रियों की उम्मीदें अब सिर्फ तेज यात्रा तक सीमित नहीं हैं—वे साफ, सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा भी चाहते हैं। अगर इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेन की इमेज पर असर पड़ना तय है।
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