30 अप्रैल 2026 की सुबह सोने और चांदी की कीमतों में मिश्रित ट्रेंड देखने को मिला है। राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में जहां सोने के दामों में गिरावट दर्ज की गई, वहीं चांदी की कीमतों में हल्की बढ़त देखने को मिली। दूसरी ओर Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर दोनों कीमती धातुएं दबाव में रहीं।
इस उतार-चढ़ाव के पीछे सबसे बड़ा कारण ग्लोबल मार्केट संकेत, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बढ़ती महंगाई की चिंता है। ऐसे माहौल में निवेशकों का रुख लगातार बदल रहा है, जिसका असर सीधे सोने-चांदी के दामों पर दिख रहा है।
सर्राफा बाजार में क्या हुआ?
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक, बीते सत्र में सोने की कीमतों में गिरावट आई। 24 कैरेट सोना करीब ₹1,52,800 प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया, जो पिछले सत्र के मुकाबले करीब ₹1,500 कम है।
वहीं, चांदी ने थोड़ा मजबूती दिखाई और इसकी कीमत ₹2,44,500 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। यानी जहां सोना मुनाफावसूली के दबाव में रहा, वहीं चांदी में हल्की खरीदारी देखने को मिली।
MCX पर कैसा रहा रुख?
Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर भी बुधवार देर रात तक कमजोरी का माहौल रहा।
सोने के दाम लगभग ₹982 (0.65%) गिरकर ₹1,49,045 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहे थे।
वहीं चांदी में ज्यादा गिरावट देखने को मिली और यह करीब ₹4,345 (1.83%) टूटकर ₹2,33,000 प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही थी।
यह दिखाता है कि इंटरनेशनल संकेतों का असर घरेलू वायदा बाजार पर ज्यादा तेज़ी से पड़ रहा है।
आज आपके शहर में सोने का रेट (April 30, 2026)
नीचे दिए गए रेट 24K, 22K और 18K के हिसाब से हैं (प्रति 10 ग्राम):
दिल्ली में 24K सोना ₹1,50,590, 22K ₹1,38,050 और 18K ₹1,12,980 पर है।
मुंबई और कोलकाता में 24K ₹1,50,440, 22K ₹1,37,900 और 18K ₹1,12,830 के आसपास चल रहा है।
चेन्नई में सोना थोड़ा महंगा है, जहां 24K ₹1,52,190 तक पहुंच गया है।
लखनऊ, जयपुर और कानपुर जैसे शहरों में भी कीमतें लगभग दिल्ली के बराबर बनी हुई हैं।

इससे साफ है कि देशभर में सोने के दामों में ज्यादा अंतर नहीं है, लेकिन स्थानीय टैक्स और डिमांड के हिसाब से मामूली फर्क देखने को मिलता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या चल रहा है?
ग्लोबल मार्केट में भी कमजोरी देखने को मिली है। हाजिर सोना करीब 0.51% गिरकर $4,573.75 प्रति औंस पर आ गया। वहीं चांदी भी $72.99 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही है।
इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेड की नीति और महंगाई को लेकर चिंता है। जब ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीद होती है, तो सोने जैसे बिना ब्याज वाले एसेट्स पर दबाव आता है।
किन फैक्टर्स ने प्रभावित किए दाम?
इस समय सोने और चांदी की कीमतों को कई बड़े फैक्टर्स प्रभावित कर रहे हैं।
सबसे पहले, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई का डर बढ़ रहा है।
दूसरा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
तीसरा, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के जतीन त्रिवेदी के अनुसार, मुनाफावसूली और मजबूत डॉलर ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है, जिससे तेजी की संभावना फिलहाल सीमित दिख रही है।
भारत में सोने की मांग का क्या हाल है?
दिलचस्प बात यह है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। World Gold Council के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में भारत की सोने की मांग 10% बढ़कर 151 टन तक पहुंच गई।
यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से निवेश मांग (investment demand) के कारण हुई है, जो यह दिखाती है कि लोग अभी भी सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं।
आगे क्या रहेगा ट्रेंड?
आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतें पूरी तरह इन बातों पर निर्भर करेंगी:
महंगाई के आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, कच्चे तेल की कीमतें और जियोपॉलिटिकल हालात।
अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सोने पर दबाव बना रह सकता है।
लेकिन अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है या आर्थिक अनिश्चितता गहराती है, तो सोना फिर से सेफ हेवन के रूप में मजबूत हो सकता है।
निष्कर्ष: निवेशकों के लिए क्या संकेत?
आज का बाजार साफ संकेत दे रहा है कि सोना और चांदी अब सिर्फ पारंपरिक निवेश नहीं रहे, बल्कि यह पूरी तरह ग्लोबल संकेतों पर निर्भर हैं।
जहां सोने में हल्की कमजोरी दिख रही है, वहीं चांदी में रुक-रुक कर मजबूती नजर आ रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला लेने की बजाय ट्रेंड और डेटा को समझकर ही निवेश करें।
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