मुंबई | 29 अप्रैल 2026 भारत में सोने के उपयोग और प्रबंधन को अधिक संगठित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। All India Gem and Jewellery Domestic Council (GJC) ने Reserve Bank of India और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर Gold Monetisation Scheme (GMS) को नए सिरे से तैयार करने पर चर्चा शुरू की है।
इस पहल का उद्देश्य है—योजना को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और डिजिटल बनाकर इसकी कम भागीदारी (low adoption) की समस्या को दूर करना।
क्या है Gold Monetisation Scheme (GMS)?
भारत सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना लोगों को:
- अपने घर में रखा सोना बैंक में जमा करने
- उस पर ब्याज कमाने
- और देश में सोने के आयात पर निर्भरता घटाने
का अवसर देती है।
लेकिन इसके बावजूद, GMS को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है।
क्यों नहीं बढ़ पाई GMS की लोकप्रियता?
विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों के अनुसार, योजना की धीमी प्रगति के पीछे कई कारण रहे हैं:
- जटिल प्रक्रिया और लंबा समय
- ग्राहकों में जागरूकता की कमी
- ज्वेलर्स की सीमित भागीदारी
- डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभाव
इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए All India Gem and Jewellery Domestic Council ने एक नया फ्रेमवर्क तैयार किया है।
GJC का नया प्रस्ताव क्या कहता है?
GJC ने एक ज्वेलर-इंटीग्रेटेड और डिजिटल मॉडल प्रस्तावित किया है, जिसमें:
- ज्वेलर्स को योजना का सक्रिय हिस्सा बनाया जाएगा
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रक्रिया आसान होगी
- ग्राहकों के लिए ट्रैकिंग और पारदर्शिता बढ़ेगी
- बैंकिंग, रिफाइनिंग और ज्वेलरी सेक्टर को एक साथ जोड़ा जाएगा
यह फ्रेमवर्क विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के बाद तैयार किया गया है।
NewsJagran Analysis: क्या बदल सकता है?
1. सोने की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बूस्ट
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक है।
अगर GMS सफल होता है:
- घरेलू सोने का बेहतर उपयोग होगा
- आयात पर निर्भरता कम होगी
- चालू खाता घाटा (CAD) घट सकता है
2. ज्वेलर्स की भूमिका होगी अहम
पहले GMS में ज्वेलर्स की सीमित भागीदारी थी।
नए मॉडल में:
- ग्राहक सीधे ज्वेलर्स के माध्यम से योजना से जुड़ सकेंगे
- भरोसा और पहुंच दोनों बढ़ेंगे
3. डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी
डिजिटल प्लेटफॉर्म आने से:
- प्रक्रिया तेज होगी
- ट्रैकिंग आसान होगी
- धोखाधड़ी की संभावना कम होगी
4. निवेश के नए अवसर
अगर योजना सफल होती है, तो:
- सोना एक निष्क्रिय संपत्ति (idle asset) से सक्रिय निवेश बन सकता है
- लोगों को ब्याज के साथ अतिरिक्त लाभ मिलेगा
क्या हैं संभावित चुनौतियां?
हालांकि प्रस्ताव मजबूत है, लेकिन कुछ चुनौतियां बनी रह सकती हैं:
- लोगों का भावनात्मक जुड़ाव (सोना बेचने/जमा करने में हिचक)
- योजना पर भरोसा बढ़ाना
- जमीनी स्तर पर इम्प्लीमेंटेशन
आगे की राह
Reserve Bank of India और वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा के बाद:
- योजना में बदलाव की आधिकारिक घोषणा हो सकती है
- पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकते हैं
- ज्वेलर्स और बैंकों को नई भूमिका दी जा सकती है
निष्कर्ष
All India Gem and Jewellery Domestic Council का यह प्रस्ताव Gold Monetisation Scheme को एक नई दिशा दे सकता है।
अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह न केवल सोने के उपयोग को बेहतर बनाएगा, बल्कि भारत की आर्थिक स्थिरता और वित्तीय प्रणाली को भी मजबूत कर सकता है।
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