लखनऊ (उत्तर प्रदेश), 12 अप्रैल (ANI): भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि देश बहुत जल्द रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाएगा और वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों की सूची में अपनी मजबूत जगह बनाएगा।
लखनऊ में आयोजित War Heroes & Veer Naris Felicitation Ceremony के दौरान उन्होंने न सिर्फ सरकार की उपलब्धियों को गिनाया, बल्कि आने वाले समय की दिशा भी स्पष्ट की। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत रक्षा उत्पादन और निर्यात दोनों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक उछाल
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है।
वित्त वर्ष 2024-25 में देश का कुल रक्षा उत्पादन ₹1.51 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, 2025-26 में रक्षा निर्यात भी बढ़कर ₹38,424 करोड़ हो गया, जो भारत के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
यह आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि यह संकेत देते हैं कि भारत अब धीरे-धीरे एक बड़े defence exporter के रूप में उभर रहा है। कुछ साल पहले तक भारत दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में शामिल था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है।
आत्मनिर्भर भारत मिशन का असर
Rajnath Singh के अनुसार, यह प्रगति ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का परिणाम है। सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में कई अहम फैसले लिए हैं, जिनमें:
- घरेलू कंपनियों को बढ़ावा
- विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना
- नई तकनीकों का विकास
- स्टार्टअप्स और MSMEs को रक्षा उत्पादन में शामिल करना
इन कदमों ने भारत के रक्षा उद्योग को नई दिशा दी है। अब देश में हथियार, मिसाइल और अन्य सैन्य उपकरणों का निर्माण तेजी से बढ़ रहा है।
लखनऊ बन रहा नया डिफेंस हब
रक्षा मंत्री ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का जिक्र करते हुए कहा कि यह शहर अब देश के प्रमुख रक्षा उत्पादन केंद्रों में शामिल हो चुका है।
लखनऊ को आगरा और कानपुर के साथ Defence Node घोषित किया गया है, जो उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर का अहम हिस्सा है।
यहां की सबसे बड़ी उपलब्धि BrahMos मिसाइल का उत्पादन है। लखनऊ में बनी ब्रह्मोस मिसाइल की पहली खेप भारतीय सेना को सौंपी जा चुकी है, जो इस क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता को दर्शाती है।
इसके अलावा, शहर में कई नई फैक्ट्रियां स्थापित हो रही हैं, जहां छोटे और बड़े स्तर पर रक्षा उपकरण बनाए जा रहे हैं। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
क्या बदल रहा है भारत के रक्षा सेक्टर में?
भारत के रक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलाव को समझना जरूरी है। पहले जहां देश को अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब स्थिति बदल रही है।
- स्वदेशी तकनीक का विकास बढ़ा है
- निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ी है
- निर्यात के नए बाजार खुले हैं
- सेना को आधुनिक और घरेलू उपकरण मिल रहे हैं
यह बदलाव केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक और रणनीतिक ताकत को भी मजबूत कर रहा है।
वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती स्थिति
रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि जिस गति से भारत आगे बढ़ रहा है, वह दिन दूर नहीं जब देश दुनिया के टॉप डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग देशों में शामिल होगा।
आज अमेरिका, रूस, चीन जैसे देश इस क्षेत्र में अग्रणी हैं, लेकिन भारत तेजी से इस सूची में अपनी जगह बना रहा है।
भारत का लक्ष्य सिर्फ आत्मनिर्भर बनना ही नहीं, बल्कि एक global defence exporter बनना भी है। इसके लिए सरकार लगातार नई नीतियां और सुधार लागू कर रही है।
समारोह में मौजूद रहे Yogi Adityanath
इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। उन्होंने भी राज्य में हो रहे रक्षा निवेश और विकास कार्यों पर जोर दिया।
कार्यक्रम के बाद दोनों नेताओं ने लखनऊ में आयोजित Shaurya Smriti लेजर लाइट और साउंड शो में हिस्सा लिया, जहां देश के वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी गई।
आम लोगों और देश के लिए क्या मतलब?
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सीधा असर आम नागरिकों पर भी पड़ता है:
- रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी
- देश की सुरक्षा मजबूत होगी
- टेक्नोलॉजी सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा
इसके अलावा, जब भारत रक्षा उपकरणों का निर्यात करेगा, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा मिलेगा।
निष्कर्ष
Rajnath Singh का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि भारत के बदलते रक्षा परिदृश्य का संकेत है।
रिकॉर्ड उत्पादन, बढ़ता निर्यात और नई औद्योगिक परियोजनाएं यह साबित करती हैं कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। अगर यही गति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगा।
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